प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा व समाज कल्याण मंत्री शंखलाल मांझी समेत बसपा प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर पर पुलिस का शिकंजा कस गया है। अलग-अलग थानों में फ्लाइंग स्क्वॉयड मजिस्ट्रेट ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के जो केस दर्ज कराए थे, उसमें ही पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों को आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का दोषी मानते हुए कोर्ट में चार्जशीट भेज दिया है।
पुलिस ने अब तक कुल 17 ऐसे मामले दर्ज किए हैं जिनमें से 10 मामलों में चार्जशीट भेज दी गई है। अब ऐसे में सभी संबंधित प्रत्याशियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा जिसमें अधिकतम एक वर्ष तक की सजा का भी प्रावधान है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही जिले में पुलिस प्रशासन ने आदर्श आचार संहिता का पालन कराने को लेकर सख्त अभियान छेड़ रखा है।
डीएम वैभव श्रीवास्तव व एसपी पीयूष श्रीवास्तव द्वारा प्रतिदिन न सिर्फ विभिन्न टीमों से प्रगति आख्या ली जा रही है, वरन सीधे तौर पर ऐसे मामलों पर नजर भी रखी जा रही है। इसी का नतीजा है कि अब तक जिले में आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के कुल 17 मामले विभिन्न थानों में दर्ज हो चुके हैं।
आचार संहिता उल्लंघन के दायरे में अकबरपुर से सपा प्रत्याशी दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा भी आ चुके हैं, जब उनके द्वारा बेवाना थाना क्षेत्र के कलुआकौरा गांव में बिना अनुमति हैंडपंप लगवाया जा रहा था। 24 जनवरी को फ्लाइंग स्क्वायड मजिस्ट्रेट अकरम अंसारी ने राममूर्ति के अलावा ठेकेदार व एक अन्य के विरुद्ध केस दर्ज कराया था।
27 जनवरी को जलालपुर थाने में सपा प्रत्याशी व समाज कल्याण मंत्री शंखलाल मांझी के विरुद्ध बिना अनुमति निजी वाहन से चुनाव प्रचार करने तथा सरकारी वाहन को एस्कार्ट के रूप में लेकर चलने के कारण फ्लाइंग स्क्वायड मजिस्ट्रेट बलराम सिंह ने केस दर्ज कराया था।
बसपा प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर पर अकबरपुर थाने में 27 जनवरी को फ्लाइंग स्क्वायड मजिस्ट्रेट शेषनाथ वर्मा ने दर्ज कराए केस में कहा था कि बिना अनुमति के प्रचार सामग्री से जुड़ी पत्रिका का वितरण कराया जा रहा था। जिले के इन तीन बड़े नेताओं के विरुद्ध केस दर्ज होने का मामला खूब उछला था।
तब माना जा रहा था कि इन मामलों में शायद ही आगे कोई प्रगति तय हो पाए। हालांकि इन सभी अटकलों को दरकिनार करते हुए संबंधित थानों की पुलिस ने दुग्ध विकास मंत्री, समाज कल्याण मंत्री व बसपा प्रदेश अध्यक्ष के विरुद्ध आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में दर्ज केस की विवेचना पूरी कर संबंधित कोर्ट में चार्जशीट भेज दी। इससे तीनों बड़े नेताओं पर अब शिकंजा कस गया है।
दरअसल सभी केस मजिस्ट्रेट का अधिकार रखने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों ने ही दर्ज कराया है। केस न्यायालय में चलने के दौरान संबंधित लोगों की मुसीबत बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में एक वर्ष तक के कारावास की सजा के साथ ही जुर्माने का प्रावधान है।
आदर्श आचार संहिता के दर्ज कुल 17 मामलों की विवेचना में जनपद पुलिस ने काफी तेजी दिखाई है। राममूर्ति, शंखलाल व रामअचल के विरुद्ध चार्जशीट भेजे जाने के साथ ही माफिया सरगना से कटेहरी ब्लॉक प्रमुख बने कटेहरी से पीस व निषाद पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार अजय सिंह सिपाही के विरुद्ध भी अहिरौली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है।
लखनऊ में यातायात विभाग के एसपी पद पर तैनात अभिषेक की मां केसरा देवी के विरुद्ध भी अकबरपुर पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय को भेज दी। वह नीली बत्ती लगी कार से बसपा के एक कार्यक्रम में पहुंची थी जहां से अधिकारियों ने तमाम दबावों को दरकिनार कर वाहन कोतवाली भिजवा दिया था।
बाद में केस भी दर्ज कर लिया। आचार संहिता के पांच अन्य मामलों में भी पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। एसपी पीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के जो मामले दर्ज हुए हैं, उन्हें लेकर चुनाव आयोग का निर्देश है कि संबंधित मामलों में विवेचना जल्द पूरी की जाए। इसके चलते ही संबंधित थानों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द विवेचना पूरी कर आवश्यक कार्रवाई तय करें। ज्यादातर मामलों में विवेचना पूरी भी कर ली गई है।