अंबेडकरनगर। जिस घर में एक माह पहले नई मोपेड आने पर खुशियां मनाई गई थीं, मंगलवार को उसी मोपेड ने परिवार की जिंदगी में ऐसा मातम ला दिया कि चार बेटियों की दुनिया ही उजड़ गई।
सुल्तानपुर के अखंडनगर क्षेत्र में नरवारी के पास स्कूल बस की टक्कर में अल्लीपुर निवासी रामलवट गुप्ता, उनकी पत्नी दुर्गावती देवी और बेटे अजय उर्फ प्रदीप की मौत के बाद जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चीख-पुकार मच गई। हादसे की खबर सुनकर पहुंची बेटी नंदनी माता-पिता और भाई के शव देखकर बेसुध हो गई। रामलवट की पांच संतानें थीं। हादसे में इकलौते बेटे अजय की मौत ने परिवार का चिराग बुझा दिया। अब पीछे चार बेटियां शिवांगी (20), प्रिया (18), नंदनी (16) और रिया (12) रह गई हैं। अस्पताल में मौजूद नंदनी बार-बार यही कहकर रो रही थी कि माता-पिता और बड़े भाई के जाने के बाद हम बहनों का ख्याल कौन रखेगा, जीवन की नैया कैसे पार होगी।
सात लोगों का सहारा थे रामलवट
एक ही हादसे ने इस परिवार से मां की ममता, पिता का सहारा और भाई की छांव एक साथ छीन ली। कल तक जिस घर में सात लोगों की जिंदगी रामलवट की मेहनत के सहारे आगे बढ़ रही थी, आज वहां चार बेटियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब उनकी जिंदगी की राह कौन संभालेगा। मृतक के साले अखिलेश ने बताया कि रामलवट ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी कमाई से सात लोगों का घर चलता था। परिवार की जरूरतों के बीच उन्होंने करीब एक माह पहले किस्त पर मोपेड खरीदी थी।
सुल्तानपुर में पोस्टमार्टम कराना चाहते थे परिजन
हादसे के बाद जिला अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर करीब दो घंटे तक रोने-चीखने की आवाजों से गूंजता रहा। परिजन रामलवट और दुर्गावती के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए सुल्तानपुर ले जाना चाहते थे, लेकिन विधिक प्रक्रिया के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। कुछ परिजन जिला अस्पताल में शवों के साथ रुके रहे तो कुछ अजय के पोस्टमार्टम के लिए अखंडनगर चले गए।
जिला अस्पताल अकबरपुर सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
जिला अस्पताल अकबरपुर सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
जिला अस्पताल अकबरपुर सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।
जिला अस्पताल अकबरपुर सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।