छठ पर्व मंगलवार को उल्लास के साथ मनाया गया। शाम को पूजा की थाली सजाकर महिलाएं नदी तट पर पहुंची और पानी में खड़ी होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। पति व पुत्र की दीर्घायु व परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके बाद लोगों में प्रसाद का वितरण कर व्रत तोड़ा।
पति व पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए मनाए जाने वाले छठ पर्व का उल्लास मंगलवार को जिले में चरम पर पहुंच गया। इसकी तैयारी महिलाएं दीपपर्व के बाद से ही कर रही थीं। उनमें उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पर्व के मुख्य दिन से एक दिन पूर्व सोमवार तक तैयारियां होती रहीं।
छठ के दूसरे दिन से ही दो दिवसीय निर्जला व्रत शुरू हुआ जो मंगलवार को भी जारी रहा। दिनभर व्रत रखने के बाद साज श्रृंगार कर महिलाएं भक्ति गीत गाती हुई निकटवर्ती नदी के घाट पर पहुंचीं और सूर्य के अस्त होने का इंतजार किया। सूर्य जब अस्त होने लगा तो महिलाएं पूूजा की थाली लेकर पानी में पहुंचीं और सूर्य देवता को अर्घ्य दिया।
इस मौके पर उन्होंने पति व पुत्र की लंबी उम्र व परिवार की खुशहाली की कामना की। इस पूजा के बाद महिलाएं घर पहुंची और जल ग्रहण कर व्रत तोड़ा। विशेष व्यंजन ठेकुवा को प्रसाद के रूप में लोगों में वितरित किया। गायत्री मंदिर के पीछे स्थित तमसा नदी के तट पर सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मनोरमा ने कहा कि वे छठ पर्व उल्लास के साथ मनाती हैं।
बताया कि व्रत तोड़ने के बाद रात में घर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। बुधवार भोर में पुन: सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाएगा। टांडा सरयू नदी के राजघाट पर सूर्य को अर्घ्य देने पहुंची पूजा व रेखा ने बताया कि छठ पर्व का उनके परिवार में खासा महत्व है।
वे प्रत्येक वर्ष इसे काफी उत्साह के साथ मनाती हैं। बुधवार की भोर में उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के बाद अन्न ग्रहण किया जाएगा।