अंबेडकरनगर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए बड़े पैमाने पर कारतूस की खरीद-फरोख्त का मामला उजागर हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि अकबरपुर स्थित अवध गन हाउस से इस वित्तीय वर्ष में बेचे गए 4200 कारतूसों में से 2200 कारतूस सिर्फ आजमगढ़ के लोगों को बेचे गए, जिनमें कई फर्जी लाइसेंस धारक भी शामिल हैं। फिलहाल जांच में जिन 30 शस्त्र लाइसेंसों से कारतूस खरीदे गए, उनमें से आठ लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने आजमगढ़ प्रशासन को पत्र भेजकर इन सभी लाइसेंसों की स्वतंत्र जांच की सिफारिश की है।
14 अगस्त को बसखारी निवासी अनुराग यादव को अवैध पिस्टल के साथ गिरफ्तार करने के बाद यह पूरा मामला सामने आया। पूछताछ में अनुराग ने खुलासा किया कि वह कारतूस आजमगढ़ के अतरौलिया निवासी ज्ञानचंद से खरीदता था। 16 अगस्त को पुलिस ने ज्ञानचंद को गिरफ्तार किया, जिसके पास से दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस और कारतूस बरामद हुए। पूछताछ में उसने और भी नाम बताए। जिसके आधार पर पुलिस ने अवध गन हाउस के मालिक सूखी लाल वर्मा और मुनीम विकास कुमार को गिरफ्तार किया। इसके अलावा, फर्जी लाइसेंस पर कारतूस खरीद में शामिल आर्यन यादव उर्फ शनि यादव (निवासी नूरी गली, बसखारी) और हेमंत यादव उर्फ सन्नू (निवासी एदलपुर डोडो) को भी जेल भेजा जा चुका है।
जांच के घेरे में आजमगढ़ के लाइसेंस धारक
एसपी केशव कुमार ने बताया कि आजमगढ़ से जुड़े सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों की सूची डीएम को भेजी गई है और उनसे इनकी जांच कराने को कहा गया है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि जिन लोगों ने भारी मात्रा में कारतूस खरीदे हैं, उनके पास वास्तव में वैध शस्त्र हैं या नहीं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी लाइसेंस के जरिए कारतूसों की अवैध आपूर्ति में लगा हुआ था।
जल्द हो सकती हैं और गिरफ्तारियां
पुलिस सूत्रों के अनुसार कारतूस की खरीद में अनियमितता मिलने पर तीन जांच टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर लाइसेंस धारकों के पते और पहचान की पुष्टि कर रही हैं। मामले की जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।