अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में आग लगने पर उससे बचाव को लेकर पूरी तरह लापरवाही का माहौल है। परिसर में लगे सात फायर बॉक्स जहां पूरी तरह निष्प्रयोज्य पड़े हैं तो 14 गैस सिलेंडर भी खराब हैं। इन्हें रिफिल नहीं कराया गया। परिसर में जगह-जगह रखी बालू से भरी बाल्टी में कहीं कूड़ा-करकट भरा है तो बालू से भरी कई बाल्टियां पान की पीक से लाल हो चुकी हैं। तीमारदार उसका प्रयोग पीकदान के रूप में करते हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। सस्ते व बेहतर इलाज की उम्मीद लगाकर जिला अस्पताल आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों के हितों को लेकर अस्पताल प्रशासन बेफिक्र है। न तो सुचारु रूप से उनकी जांच हो रही और न ही इलाज। पेयजल व साफ-सफाई की जहां लंबे समय से दरकार है, वहीं आग से निपटने को लेकर भी अस्पताल प्रशासन पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।
कहने को जिला अस्पताल में आग से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं लेकिन देखभाल के अभाव में ज्यादातर यंत्र या तो निष्प्रयोज्य हो गए हैं या फिर खराब पड़े हैं। इनकी देखभाल की सुध जिम्मेदारों को नहीं है।
परिसर में सात फायर बॉक्स लगे हुए हैं लेकिन देखभाल के अभाव में यह से भी पूरी तरह निष्प्रयोज्य हो गए हैं। इन्हें दुरुस्त करने की सुध नहीं ली जा रही है। परिसर में 14 गैस सिलेंडर जगह-जगह लगे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर एक्सपॉयर हो चुके हैं। इसके बावजूद सिलेंडर पर लगे पुराने लेबल को खुरचकर उनके स्थान पर नया लेबल लगा दिया गया है। इन्हें रिफिल तक नहीं कराया गया है।
परिसर में जगह-जगह एक दर्जन से अधिक बालू भरी बाल्टियां तो रखी हैं लेकिन उनमें से कुछ में जहां कूड़ा-करकट भरा हुआ है, वहीं ज्यादातर बाल्टियां पीकदान बन गई हैं। उनमें भरा बालू पान की पीक से लाल हो चुका है।
आग से निपटने को लेकर अस्पताल प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ज्यादातर कर्मचारियों को आग बुझाने के तरीके के बारे में ही जानकारी नहीं है। उन्हें यह भी नहीं पता कि जो यंत्र लगे हैं, उनका प्रयोग किस तरह किया जाता है। इस संबंध में जब अमर उजाला टीम ने कुछ कर्मचारियों से जानकारी हासिल की तो उन्होंने इनके प्रयोग से अनभिज्ञता जताई।
इस पर वहां मौजूद तीमारदारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि समय-समय पर अभियान चलाकर कर्मचारियों को यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। तीमारदार राजितराम व कमलेश ने कहा कि सिर्फ यंत्र लगा देने से कुछ होने वाला नहीं है। इनका संचालन किस प्रकार होता है, इसकी भी जानकारी कर्मचारियों को दी जानी चाहिए।
सीएमएस डॉ. एसके गौतम ने बताया कि आग से बचाव को लेकर जरूरी इंतजाम उपलब्ध हैं। जो कुछ उपकरण खराब हैं, उन्हें जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा। मरीजों के हितों का ध्यान प्राथमिकता पर रखा जा रहा है।