हाईकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पराजित हुई बसपा प्रत्याशी व अन्य की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 10 मत खारिज होने को गड़बड़ी नहीं माना है। इससे पहले प्रशासन की तरफ से कोर्ट में पूरी प्रक्रिया का पक्ष रखा गया। इसके बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया।
फैसले से जहां अध्यक्ष पद पर विजयी हुए सपा प्रत्याशी के खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं तमाम उम्मीदें लगाए दूसरा खेमा मायूस दिखा। 43 सदस्यीय जिला पंचायत में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सपा प्रत्याशी सुधीर सिंह मिंटू व बसपा प्रत्याशी शोभावती वर्मा आमने-सामने थीं।
दोनों ही प्रत्याशियों का समर्थन करने वाले दलों ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। इसी बीच बसपा प्रत्याशी शोभावती वर्मा और पांच अन्य जिला पंचायत सदस्यों तबस्सुम, तारावती, जगदीश, हरीराम व निर्मला ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि न चाहते हुए भी उन्हें सुरक्षाकर्मी मुहैया कराए गए हैं, जिससे कि सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी को फायदा पहुंचाया जा सके।
बसपा प्रत्याशी ने इसके अलावा चुनाव जनपद न्यायाधीश की देखरेख व पैरामिलेट्री फोर्स के साथ कराने की मांग की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन से जवाब मांगा था। कोर्ट ने मतदान को वीडियोग्राफी के बीच कराने का निर्देश देते हुए 12 जनवरी को सुनवाई की तिथि तय की थी।
प्रशासन ने अपने जवाब में कहा था कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर सुरक्षाकर्मी लगाए गए थे, जिन्हें सदस्यों की आपत्ति के बाद हटा लिया गया है। इस बीच हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी सुधीर उर्फ मिंटू सिंह ने सात मत से जीत दर्ज कर ली थी।
उन्हें 20 मत प्राप्त हुए, जबकि बसपा प्रत्याशी शोभावती को 13 मत मिले थे। 10 मत निरस्त हो गए थे क्योंकि दोनों प्रत्याशियों के समक्ष अंकन हो गया था। इस पर बसपा प्रत्याशी ने कोर्ट में कहा कि गलत ढंग से उनके समर्थक मतदाताओं के मत पत्र निरस्त किए गए हैं।
बसपा प्रत्याशी रहीं शोभावती वर्मा के पति पूर्वमंत्री लालजी वर्मा ने कहा कि सपा प्रत्याशी ने बेईमानी कर चुनाव जीता है। इसका पता एक वर्ष बाद तब चलेगा, जब अविश्वास प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 26 सदस्य अब भी पूरी तरह उनके साथ हैं। ऐसे में बहुमत किसके साथ है, इसका फैसला एक वर्ष बाद हो जाएगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर विजयी हुए सुधीर सिंह के चुनाव का संचालन करने वाले दुग्ध विकासमंत्री राममूर्ति वर्मा ने कहा कि सच सामने आ चुका है। फर्जी व मनगढ़ंत आरोपों से कुछ हासिल नहीं होता। न्यायालय ने भी सच के अनुरूप फैसला सुनाया है।
यह कितना हास्यास्पद है कि निरस्त हुए सभी 10 मत को बसपा अपने खेेमे का बता रही है। न्यायालय में भी यह साबित नहीं किया जा सका कि सभी निरस्त मत किस खेमे के हैं। गोपनीय चुनाव के कारण कोई भी दल यह दावा कर ही नहीं सकता कि किस सदस्य का मत निरस्त हुआ और वह किस खेमे का है।
जिलाधिकारी विवेक ने कहा कि मंगलवार को हुई हाईकोर्ट की सुनवाई में शोभावती व अन्य की याचिका खारिज कर दी गई है। मामले में न्यायालय को बताया गया कि नामांकन से लेकर नाम वापसी तक की प्रक्रिया वीडियोग्राफी के बीच कराई गई। मतदान और मतगणना की संपूर्ण प्रक्रिया वीडियोग्राफी व सीसीटीवी कैमरे की देखरेख में हुई।