जिले की चार विधानसभा सीटों पर सोमवार को रिकॉर्ड मतदान हुआ। जनपद गठन के बाद ये पहला मौका है, जब लगभग 64.88 प्रतिशत मतदान हुआ है। इससे पहले वर्ष 1996 के चुनाव में भी इन्हीं चार सीटों पर लगभग 64 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन इसके बाद से बीते विधानसभा चुनाव तक मतदान का प्रतिशत इससे ज्यादा नहीं हो सका।
1995 में जनपद गठन के बाद से हो रहे विधानसभा चुनाव में ये पहला मौका था, जब जनपदवासियों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार के लिए हुए मतदान में लगभग 65 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया, जो अब तक सर्वाधिक मत प्रतिशत है।
वर्ष 2012 के चुनाव में जिले में 62 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2007 के चुनाव में लगभग 54 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। 2002 के विधानसभा चुनाव में लगभग 58 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान केन्द्रों तक पहुंचकर मत डाले थे।
वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में लगभग 54 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि वर्ष 1996 में हुए चुनाव में 64 प्रतिशत से कुछ अधिक मतदान हुआ था, तब कटेहरी में 60.76, अकबरपुर में 67.05, जलालपुर में 63.42 व टांडा में 65.22 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इसके बाद से चुनाव में मत प्रतिशत ज्यादा नहीं रहा। इस बार विधानसभा चुनाव शुरू होने पर यह उम्मीद थी कि 65 प्रतिशत या इससे अधिक मतदान हो सकता है। सोमवार सुबह से ही जब मत प्रतिशत बढ़ने का दौर शुरू हुआ तो लगा कि मतदान प्रतिशत 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, दोपहर बाद मतदाताओं के रुख में कमी आने के कारण मतदान का प्रतिशत यह आंकड़ा नहीं छू पाया फिर भी रिकॉर्ड मतदान के साथ जिले में पांचवें चरण का चुनाव निपट गया। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न होने पर सभी को बधाई दी है।