आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मसेना मिर्जापुर स्थित शांति विहार कॉलोनी में चातुर्मास कथा का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को कथा प्रवाचक श्रीनिवास दास वेदांती ने शिवधनुष और उससे जुड़े ऐतिहासिक व दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला।
पूर्व विकास संयुक्त आयुक्त उग्रसेन पांडेय ने अपनी पत्नी के साथ कथा व्यास श्रीनिवास दास वेदांती का विधिवत पूजन किया। कथा प्रवाचक ने बताया कि धनुष मंडप में महाराजा जनक के निमंत्रण पर पूरे देश के नामी-गिरामी राजा एकत्रित हुए। जिनमें बाणासुर और रावण जैसे महाशक्तिशाली शासक भी शामिल थे। राजा जनक ने सभी के समक्ष यह घोषणा की कि जो भी शिवधनुष को खंडित करेगा, वही जानकी का वरमूर्ति बनेगा। राजाओं ने एक के बाद एक प्रयास किया, लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला नहीं पाया। रावण के मन में अहंकार की भावना थी, जिसने उसे इस पवित्र कार्य में विफल किया। बल के अतिव्यापी प्रयोग से धनुष और भी भारी होता गया। रावण जैसी महाशक्ति की असफलता यही सिखाती है कि अहंकार वीरता को परास्त कर देता है।