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ब्लड बैंक में खून की कमी, मरीजों की जान पर बनी

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अंबेडकरनगर। मौत के मुहाने पर खड़े मरीजों के लिए जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में खून ही नदारद है। कई प्रमुख ग्रुप का एक यूनिट तक खून नहीं है। जिन ग्रुप के ब्लड इन दोनों अस्पतालों में हैं भी, उनकी मात्रा अत्यंत सीमित है। हालत इतनी खराब है कि 300 यूनिट क्षमता वाले जिला अस्पताल में मात्र आठ यूनिट, जबकि 300 यूनिट की क्षमता वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज में मात्र 12 यूनिट ब्लड ही उपलब्ध है। अब ऐसे में मरीजों को खून की जरूरत होने पर उनके तीमारदार बदहवास होकर इधर से उधर चक्कर लगाने को विवश रहते हैं। इसके बाद भी उनके हाथ असफलता ही लगती है। दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन औसतन छह यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है। ऐसे में मौत के मुहाने पर खड़े मरीजों को ब्लड को लेकर कितनी समस्या खड़ी हो सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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गंभीर बीमारियों या फिर गंभीर रूप से घायल हुए नागरिकों के लिए जिले में संकट बढ़ गया है। ऐसे उन मामलों में जहां तत्काल रक्त की जरूरत होती है, वहां मरीजों व तीमारदारों के सामने चुनौती और ज्यादा हो गई है। मौत के मुहाने पर खड़े मरीजों को जिला अस्पताल से लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज तक में खून मिल पाना संभव नहीं रह गया है। बताते चलें कि जिले में दो सरकारी ब्लड बैंक हैं, जिसमें जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इन दोनों अस्पतालों में स्थापित ब्लड बैंकों की क्षमता 300-300 यूनिट है। इन ब्लड बैंक में खून की कमीं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में मात्र 20 यूनिट खून शेष बचा है। इसमें जिला अस्पताल में 8 यूनिट, जबकि राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में 12 यूनिट ब्लड है।
प्रतिदिन इन दोनों अस्पतालों में औसतन 6 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति तो यह है कि जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में अलग अलग ब्लड ग्रुप का एक यूनिट तक रक्त उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में ओ पॉजीटिव, बी पॉजीटिव व ए निगेटिव ग्रुप का खून नहीं है, जबकि राजकीय मेडिकल कॉलेज में एबी पॉजीटिव ग्रुप का खून नदारद है। उल्लेखनीय है कि आमतौर पर मरीजों को ओ पॉजीटिव ग्रुप के खून की जरूरत ज्यादा पड़ती है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में इसी ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है, जबकि मेडिकल कॉलेज ओ पॉजीटिव का सिर्फ 2 यूनिट ब्लड मौजूद है। ऐसे में यदि कोई मौत के मुहाने पर खड़ा हो, तो उसे किस प्रकार से ब्लड उपलब्ध हो सकेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक प्रभारी डा. एएम त्रिपाठी ने बताया कि 300 यूनिट क्षमता की तुलना में 8 यूनिट ब्लड उपलब्ध है। इसमें ए पॉजीटिव के 1, बी निगेटिव के 2, एबी पॉजीटिव के 1, एबी निगेटिव के 1, ओ निगेटिव के 3 यूनिट उपलब्ध है, जबकि ओ पॉजॉटिव, बी पॉजीटिव व ए निगेटिव नहीं है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक प्रभारी डा. मनोज गुप्ता ने बताया कि 300 यूनिट क्षमता की तुलना में 12 यूनिट ब्लड मौजूदा समय में उपलब्ध है, जिसमें ए निगेटिव के 2, बी निगेटिव के 1, ओ निगेटिव के 1, एबी निगेटिव के 1, ओ पॉजीटिव के 2, बी पॉजीटिव के 2, ए पॉजीटिव के 3 यूनिट उपलब्ध है। बताया कि एबी पॉजीटिव नहीं है। बताया कि प्रतिदिन औसतन 5 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है।
दोनों ब्लड बैंक में खून की कमी होने का एक बड़ा कारण मानकों को दरकिनार किया जाना भी है। पिछले दिनों तमाम संगठनों व नागरिकों ने रक्तदान किया था। बड़ी तादाद में रक्त लिया गया था। हालांकि खून को ज्यादा दिन तक स्टोर नहीं किया जा सकता है, फिर भी जो खून उपलब्ध था, उसमें से कई यूनिट खून राजनीतिक व आधिकारिक दबाव में दे दिए जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार कई मामलों में बिना रक्त लिए ही संबंधित मरीजों को खून दे दिए गए, जबकि अत्यंत गंभीर मामलों में ही ऐसा करने के निर्देश हैं। सूत्रों के अनुसार प्रतिमाह इस प्रकार के दबाव सामने आते रहते हैं। इसके चलते भी 10 से 15 यूनिट ब्लड कम हो जाता है। ऐसा होते होते ब्लड बैंक में कई ग्रुप के ब्लड में कमीं होती जा रही है। यह ब्लड बैंक के लिए एक जटिल समस्या बनती जा रही है।
ब्लड की मौजूदा समय में ब्लड बैंक में कमीं है। इसे पूरा करने के लिए संबंधित एनजीओ से संपर्क किया जा रहा है। शीघ्र ही कैंप लगाकर संबंधित ग्रुप के ब्लड की कमीं को पूरा किया जाएगा।
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डा. अशोक कुमार, सीएमओ
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