विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। टांडा के जियापुर में राम जानकी मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को भागवत प्राकट्य और उसके उद्देश्य का वर्णन किया गया। प्रवाचक देव कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण का प्राकट्य भगवान कृष्ण की लीलाओं के पूर्ण होने के उपरांत हुआ, जिसका उद्देश्य मानव को धर्म, भक्ति और मोक्ष का मार्ग दिखाना है।
श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसमें वर्णित प्रसंग मनुष्य को विचार, वैराग्य, ज्ञान और ईश्वर से जुड़ने का मार्ग बताते हैं। भागवत का प्राकट्य लोककल्याण के लिए हुआ, जिससे जीव को संसार के बंधनों से मुक्त होने की प्रेरणा मिलती है। राजा परीक्षित के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया।