उनके सामने कई अनुभवी प्रत्याशी थे, लेकिन इसकी परवाह किए बगैर रिंकल ने अपने पति के साथ चुनाव में परिश्रम किया। इसका परिणाम भी सार्थक रहा। उन्होंने निवर्तमान ग्राम प्रधान राधेश्याम दुबे की पत्नी पुष्पा देवी को पराजित कर दिया।
मुकाबला अत्यंत नजदीकी साबित हुआ, लेकिन किस्मत रिंकल के साथ रही। वह 18 मत से जीत कर भीटी तहसील की जैतूपुर ग्राम पंचायत की प्रधान चुन ली गईं। महज 23 वर्ष की उम्र में ग्राम प्रधान चुने जाने पर उन्हें लगातार बधाई मिल रही है। उनकी गिनती जिले के सर्वाधिक युवा ग्राम प्रधानों में हो रही है।
रिंकल ने अमर उजाला से बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यही सोचकर उन्होंने विवाह के उपरांत भी अपनी शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया। पति संजय सिंह ने भी इसमें उनका साथ दिया, और एलएलबी में दाखिला कराने में मदद की।
इसी बीच ग्राम प्रधान चुनाव के चलते उधर से ध्यान हटाकर उन्होंने पूरी तैयारी के साथ चुनाव में जुटने का फैसला किया। जीत से खुश रिंकल ने कहा कि युवाओं के बूते ही परिवर्तन की गाथा लिखी जा सकेगी। इसका स्पष्ट प्रमाण न सिर्फ उनके ग्राम पंचायत की जनता अगले पांच वर्ष के कार्यकाल में देखेगी, वरन जिले के अन्य क्षेत्र में भी उनकी ग्राम पंचायत नजीर के तौर पर जानी जाएगी।
बोलीं कि उन्हें मालूम है कि इस काम में कठिनाई बहुत है, लेकिन वे पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेंगी। किसने उन्हें वोट दिया, और किसने नहीं इन बातों का आगे कोई मतलब नहीं रहेगा। रिंकल के मुताबिक इस चुनाव में प्रधान पद पर युवाओं की जो धमक बनी है, उसकी गरिमा निर्वाचित हुए युवाओं को बनाए रखनी होगी। विकास के लिए सम्यक प्रयास सभी बड़े बुजुर्गों के साथ करना होगा।