मनरेगा जॉबकार्डधारकों के घर जाकर उनसे रोजगार और गांवों में कराए जाने वाले विकास बारे में जानकारी देने की योजना खंड विकास अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी की भेंट चढ़ गई।
इसका खुलासा शनिवार को पहुंचे उपायुक्त ग्राम्य विकास संतोष कुमार पांडेय के निरीक्षण में हुआ। उन्होंने कटेहरी ब्लाक के नंदूपुर गांव में जाकर योजना के बारे में जानकारी की तो मजूदरों ने ऐसी कोई भी जानकारी होने से मना कर दिया। इस पर उन्होंने खंड विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई।
मालूम हो कि मनरेगा जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है। इसके लिए केन्द्र ने सघन सहकारी नियोजन अभ्यास योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य है कि सभी मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का रोजगार देना और वित्तीय वर्ष 2016-17 में गांव में होने वाले जरूरी कामों की जानकारी देना है।
इसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी व ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत डोर टू डोर मनरेगा मजदूरों से संपर्क कर उन्हें 100 दिन का रोजगार देने व विकास कार्यों की जानकारी देनी थी।
योजना के तहत जिले के कटेहरी व भीटी ब्लाक का चयन किया गया। 13 जनवरी से दोनों ब्लाकों के 187 ग्राम पंचायतों में यह कार्य शुुरू होना था। लेकिन अब तक एक भी गांव में कोऊ भी नहीं पहुंचा।
शनिवार को जब ग्राम्य विकास विभाग के उपायुक्त संतोष कुमार पाण्डेय योजना की हकीकत जानने के लिए कटेहरी ब्लॉक के नंदूपुर गांव पहुंचे तो पता चला कि सब कुछ कागजी कार्रवाई तक की सीमित रखा गया है। जॉबकार्डधारकों के घर तक जाने की किसी ने जरूरत नहीं समझी।
जॉबकार्डधारकों को योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस पर श्री पांडेय ने खंड विकास अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। कहा कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।