इससे जहां विभाग को चूना लग ही रहा है वहीं इसका खामियाजा भी मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक महज एक मेडिकल स्टोर पर ही कार्रवाई की जा सकी है।
जिले में मनमाने तरीके से मेडिकल स्टोरों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन विभाग पूरी तरह से आंख मूंदे हुए हैं। बाजारों में खुले ज्यादातर मेडिकल स्टोर संचालन संबंधी मानकों पर खरे नहीं अप्रशिक्षित लोग दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। वे बेरोक-टोक दवाओं की बिक्री कर रहे हैं।
नियमानुसार मेडिकल स्टोर की लम्बाई व चौड़ाई का एक मानक होना चाहिए। कई दवाएं ऐसे भी होती हैं, जिनको सामान्य तापमान में नहीं रखा जा सकता। इसके लिए मेडिकल स्टोर संचालक के पास डीपफ्रीजर व फ्रिज होना जरूरी है।
इसके अलावा इन दवाओं की बिक्री के लिए फार्मासिस्ट होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन मानकों के पूर्ण होने के बाद विभाग से मेडिकल संचालन के लिए अनुमति पत्र दिया जाता है। यह भी निर्देश होता है कि शासन से प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पाए जाने पर अनुमति पत्र रद्द कर दिया जाएगा।
जिले में कई मेडिकल स्टोर इन मानकों पर खरे नहीं हैं लेकिन विभाग इन पर मेहरबान है। हालत यह है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 लगभग साढ़े 6 माह बीत चुका है, लेकिन विभागीय कार्रवाई न के बराबर है। कार्रवाई को लेकर विभागीय आंकड़ों पर ही गौर करें तो विभाग अब तक महज एक मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई कर सका है।
सूत्रों की मानें तो लक्ष्मी मेडिकल स्टोर मीरानपुर से नियो क्लोबोनेट जीएम, यादव मेडिकल एजेंसी बसखारी से मेगलो प्रीमियम फेयरनेश क्रीम, न्यू सेवा मेडिकल स्टोर जलालपुर से क्रीपो वीआईडी नामक दवाओं का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया था। जांच में यह दवाएं मिसब्रांड पायी गईं। इस पर तीनों स्टोर मालिकों को नोटिस जारी की गई है।
विभाग की उदासीनता के चलते जिले के मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाएं कोडिंग में बिक रही हैं। अपरचित व्यक्ति को यह दवाएं नहीं मिल पाती, लेकिन परिचितों या फिर कोडिंग जानने वाले ग्राहकों को यह दवाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। पशुओं से दूध निकालने वाली या फिर नशे में प्रयोग करने वाले प्रतिबंधित सीरप व टेबलेट के लिए अलग अलग कोड निर्धारित किया गया है।
दोस्तपुर रोड स्थित एक पशु व्यवसायी ने बताया कि मेडिकल स्टोरों पर आक्सीटोन नामक दवा मिलती है। दो घंटे में खासी बंद करने के लिए कोरेक्स जैसे सीरप, नींद बहुत आ रही कहने पर बिलियम टेन, स्पाशमो सहित कई नशीले टेबलेट उपलब्ध हो जाते हैं। इन दवाओं को बकायदा रुई या पट्टी के नए बंडलों में रखा जाता है, जिससे जांच के दौरान रुई या पट्टी आदि के बहाने बचाया जा सके।