यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के तत्वावधान में शुक्रवार को जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 174 ब्रांचों के सापेक्ष 114 ब्रांचों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे लगभग साढ़े 11 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की आड़ में बैंकों के निजीकरण करने की प्रक्रिया के विरोध में विभिन्न बैंकों के अधिकारी व कर्मचारियों ने अपनी-अपनी बैंक शाखा के सामने प्रदर्शन किया।
कहा गया कि केंद्र सरकार सहयोगी बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में विलय करने पर अड़ी हुई है। इससे न सिर्फ बैंकों के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि इसमें कार्यरत कर्मचारियों के समक्ष भी विभिन्न प्रकार के संकट खड़े होंगे। चेतावनी दी गई कि यदि इस तरफ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन ने शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न बैंकों की कुल 174 शाखाएं हैं। इनमें से ग्रामीण बैंकों समेत कुल 60 बैंक हड़ताल में शामिल नहीं थे जबकि 114 बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर थे। शुक्रवार सुबह संबंधित बैंकों के कर्मचारी अपने-अपने बैंक पहुंचे।
मुख्य गेट पर ताला जड़कर प्रदर्शन करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। यूनियन जिलाध्यक्ष एस उपाध्याय के नेतृत्व में रमाकांत पांडेय, प्रदीप यादव, सुनील कुमार, प्रदीप यादव व मोहम्मद यूनुस आदि ने जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न शाखाओं के समक्ष प्रदर्शन करते हुए कहा कि कर्मचारियों के हित को लेकर किसी प्रकार का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कहा गया कि भारत सरकार भारतीय स्टेट बैंक में सहयोगी बैंकों के विलय पर अड़ी हुई है। यदि ऐसा होगा तो इससे बैंकों के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। निजी बैंकों का विस्तार होगा जिससे कारपोरेट जगत को व्यापक लाभ होगा। निजीकरण होने से बैंकों में कार्य कर रहे कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को अपने कदम वापस खींचने ही पड़ेंगे।
चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही इस तरफ ठोस कदम नहीं उठाया गया तो बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होंगे। उधर, बैंकों की हड़ताल के चलते जिले में शुक्रवार को लगभग साढ़े 11 करोड़ रुपये के लेनदेन के कार्य पर सीधा असर पड़ा। हड़ताल की जानकारी न होने पर शुक्रवार को कई उपभोक्ता धननिकासी व जमा करने के लिए जिला मुख्यालय स्थित विभिन्न बैंक शाखाओं पर पहुंचे।
हड़ताल होने के चलते काम न होने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। कटेहरी से आए उपभोक्ता रजनीश व पहितीपुर के रामउजागिर ने कहा कि उन्हें आवश्यक कार्य के लिए धन की आवश्यकता थी लेकिन बैंक बंद होने के चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। कुर्कीबाजार के अमित व संदीप कुमार ने कहा कि हड़ताल के चलते मजदूरों का भुगतान नहीं किया जा सका।
कहा कि यदि हड़ताल थी तो एक दिन पहले ही इसकी सूचना बैंक प्रशासन को गेट के बाहर चस्पा कर देनी चाहिए थी जिससे उपभोक्ताओं को बेवजह की दौड़ न लगानी पड़ती। बैंकों में हड़ताल के चलते तो उपभोक्ताओं को धननिकासी के लिए मायूस होकर लौटना ही पड़ा, एटीएम सेवा के भी साथ छोड़ देने से उन्हें विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा।
कुछ एटीएम बूथ पर तो सुबह से ही धन न होने का बोर्ड लग गया तो कुछ से एक घंटे तक लोगों को लाभ मिला। इसके बाद सेवा ठप हो गई। इससे धननिकासी के लिए उपभोक्ताओं को एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ा।
मेडिकल की छात्रा संगीता व उर्मिला ने कहा कि उन्हें धन की आवश्यकता था लेकिन एटीएम सेवा ठप होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। एलडीएम अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि 174 के सापेक्ष 114 के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे लगभग साढ़े 11 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।