गुरुवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी बड़ी बाजारों में धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग हुआ। दुकानदारों ने बेखौफ होकर पॉलीथिन बैग में सामानों को दिया। आम लोग भी रोक संबंधित निर्देश को लेकर बेफिक्र रहे।
पूर्व की दिनों की तरह ही वे बिना किसी झोले या बैग के सामान व सब्जी लेने के लिए दुकानों पर पहुंचे। छापेमारी के भय से कई पॉलीथिन कैरीबैग विक्रेताओं ने दुकानों से पालीथिन हटा दी। इसकी बिक्री नहीं की।
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए बीते दिनों प्रदेश सरकार ने पॉलीथिन कैरीबैग की बिक्री व प्रयोग पर पूरी तरह रोक का निर्देश दिया था। 21 जनवरी गुरुवार से इसकी बिक्री व प्रयोग पर रोक लगाने संबंधी निर्देश भी बीते दिनों दिया गया था।
निर्देश में कहा गया कि यदि कोई इसका उल्लंघन करते हुए पकड़ा गया, तो उसे पांच वर्ष का कारावास होगा। इन सबके बावजूद प्रशासन पूरी तरह लापरवाह बना रहा। रोक संबंधी आदेश का अनुपालन कराने के लिए न तो किसी टीम का गठन किया गया और न ही किसी प्रकार की कार्य योजना तैयार की गई।
इस संबंध में न तो कोई विज्ञप्ति ही जारी की गई और न ही किसी प्रकार का प्रचार प्रसार किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि रोक के बाद भी गुरुवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी बड़ी बाजारों में धड़ल्ले से पालीथिन कैरीबैग का प्रयोग होता रहा।
प्रतिदिन की तरह बगैर लोग किराना, जनरल स्टोर व सब्जी सहित अन्य दुकानों पर खाली हाथ पहुंचे, तो वहीं दुकानदारों ने भी बगैर किसी खौफ के पालीथिन कैरीबैग में सामान दिया।