भीटी। क्षेत्र के तरसावां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन रविवार को हवन-यज्ञ के साथ किया गया। कथा के पूर्ण होने के बाद वैदिक विधि-विधान से हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आचार्य राही ने यज्ञ की प्रक्रिया और उसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आचार्य ने बताया कि हवन-यज्ञ कथा आयोजन का अंतिम चरण होता है, जिसके माध्यम से कथा के दौरान प्राप्त ज्ञान और संकल्प को कर्म रूप दिया जाता है। जीवन में ज्ञान और कर्म का संतुलन आवश्यक है।अनुशासन और संयम से किया गया कार्य सकारात्मक परिणाम देता है। आत्मशुद्धि के लिए नियमित आत्ममंथन जरूरी है। शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ आयोजन यज्ञ में आहुति देने के दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ मंत्रोच्चार करते नजर आए। यज्ञ के दौरान अग्नि में आहुति देकर शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना की गई। आचार्य राही ने कहा कि हवन-यज्ञ केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक शुद्धि का माध्यम भी है।