अंबेडकरनगर। इब्राहिमपुर थाने में दर्ज हत्या, अपहरण, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश के मामले में सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने अयोध्या के महाराजगंज-मया बाजार निवासी कमल प्रसाद यादव की पहली जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, पूनम वर्मा ने सुल्तानपुर एसपी को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि उनके पति रामजी वर्मा मुंबई में कारोबार करते थे। कमल प्रसाद और संजय यादव से उनके कारोबारी संबंध थे। नौ मई 2024 को मुंबई से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचने के बाद रामजी लापता हो गए। इसके बाद दोनों आरोपियों के मोबाइल बंद मिले। बैंक ऑफ बड़ौदा की सोनगांव शाखा के खाते से एटीएम के जरिए 50 हजार रुपये निकाले जाने की बात भी सामने आई।
कूरेभार थाने में दर्ज अपहरण के मुकदमे की विवेचना इब्राहिमपुर स्थानांतरित होने के बाद हत्या के लिए अपहरण, हत्या, साक्ष्य मिटाने और साजिश की धाराएं जोड़ी गईं।
बचाव पक्ष ने कमल प्रसाद को निर्दोष बताते हुए कहा कि अपराध से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष या भरोसेमंद साक्ष्य नहीं है। पुलिस हिरासत में दर्ज कथित इकबालिया बयान की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए गए। आरोपी 26 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में है और सहआरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य की सभी कड़ियां मजबूत होनी चाहिए। कमल प्रसाद के खिलाफ लास्ट सीन साक्ष्य नहीं मिला, न हथियार या मृतक का सामान बरामद हुआ। डंपिंग यार्ड के स्वतंत्र गवाह से पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए जमानत मंजूर की। साथ ही हर तारीख पर उपस्थित रहने, मुकदमे में सहयोग करने और गवाहों व साक्ष्यों को प्रभावित न करने की शर्त लगाई। उल्लंघन पर जमानत निरस्त हो सकती है।