अंबेडकरनगर। जिलेभर में रविवार को भादो मास की अमावस्या के बाद पड़ने वाला बड़का इतवार पर्व परंपरागत आस्था के साथ आज मनाया जाएगा। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखेंगी और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान सम्पन्न होंगे। यह सूर्योपासना और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़का इतवार का पर्व विशेष रूप से सूर्य देव की आराधना से जुड़ा है। सूर्य की उपासना को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतति की प्रगति होती है। आचार्य पंकज शास्त्री ने कहा कि यह पर्व ऋतु चक्र और खगोलीय परिवर्तन के आधार पर मनाया जाता है। इस परंपरा से लोगों को प्रकृति के साथ तालमेल साधने का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि सूर्य बिना सृष्टि की कल्पना असंभव है। यही कारण है कि यह पर्व सूर्योपासना का प्रत्यक्ष रूप है। भारतीय समाज ने इसे परिवार और गृहस्थ जीवन की स्थिरता से जोड़ा है, जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा जीवित बनी हुई है।