अंबेडकरनगर। टांडा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा कृषि भूमि के आधार पर तय करने के मामले में जिला जज चंद्रोदय कुमार की अदालत ने मध्यस्थ/जिलाधिकारी की ओर से 10 जून 2022 को पारित आर्बिट्रल अवार्ड (मुआवजा) निरस्त कर दिया। अदालत ने पक्षकारों को नए सिरे से मध्यस्थता की कार्रवाई शुरू करने की स्वतंत्रता दी है।
मामला टांडा तहसील के त्रिलोकपुर गांव निवासी 69 वर्षीय दर्शना देवी की 0.610 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। यह जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-233 के चार लेन चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई थी। सक्षम प्राधिकारी ने राजस्व अभिलेखों में जमीन कृषि भूमि दर्ज होने के आधार पर मुआवजा तय किया था। इससे असंतुष्ट दर्शना देवी ने मुआवजा बढ़ाने के लिए मध्यस्थ के समक्ष दावा किया, जिसे 10 जून 2022 को खारिज कर दिया गया।
दर्शना देवी ने याचिका में बताया कि जमीन टांडा नगर पालिका सीमा के निकट और खड़ंजा मार्ग से लगी है। आसपास आवासीय और व्यावसायिक निर्माण होने के कारण जमीन में आवासीय व व्यावसायिक संभावनाएं हैं। इसके बावजूद मुआवजा तय करते समय केवल जमीन की कृषि प्रकृति को आधार बनाया गया।
जिला जज ने कहा कि राजस्व अभिलेख में जमीन का कृषि दर्ज होना बाजार मूल्य निर्धारण का अंतिम आधार नहीं हो सकता। जमीन की स्थिति, आसपास का विकास, सड़क से जुड़ाव और अधिग्रहण की तारीख पर उसकी संभावित बाजार कीमत का भी आकलन जरूरी है। अदालत ने विक्रय पत्रों के मूल्यांकन में भी कमी पाई। इसी आधार पर पुराना अवार्ड निरस्त कर दिया गया। इससे पहले अदालत धौरहरा निवासी राजेंद्र समेत पांच लोगों के मामले में भी अवार्ड निरस्त कर चुकी है।