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बैरंग लौटी ऑडिट करने गई टीम

Thu, 31 Dec 2015 10:04 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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संबंधित गावों में न तो ग्राम विकास अधिकारी मिले और न ही रोजगार सेवक। इसके चलते विकास कार्यों से संबंधित कोई पत्रावली भी टीम को उपलब्ध नहीं हो सकी। टीम ने पूरी रिपोर्ट डीएम व सीडीओ को भेज दी है।
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गावों में विद्युतीकरण, आवागमन, शौचालय, जलनिकासी, मार्ग प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है। उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं गांव में विकास कार्य को लेकर संबंधित अधिकारी गंभीर नहीं हैं।

एक दिन पूर्व बुधवार को रामनगर विकास खण्ड के नौ गांवों में विकास कार्यों के सत्यापन के लिए सोशल आडिट टीम गई, लेकिन किसी अधिकारी या कर्मचारी के न मिलने से टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा। वर्ष 2014-15 में इंदिरा आवास व मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों के सत्यापन के लिए जिले के सभी नौ विकास खण्ड में तैनात ब्लाक सोशल आडिट कोआर्डिनेटर को जिम्मेदारी दी गई।
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विकास कार्यों के सत्यापन के लिए बुधवार को रामनगर विकास खंड के अरमा गांव में अकबरपुर कोआर्डिनेटर लालजी, सतरही में भियांव कोआर्डिनेटर शशिकला, चकपुरवा में जहांगीरगंज कोआर्डिटन रामजी मिश्र, सहिजना हमजापुर में बसखारी कोआर्डिनेटर निशा सिंह, न्यौरी दुर्राजपुर में रामनगर कोआर्डिनेटर माला मौर्या, न्यौरी में जलालपुर कोआर्डिनेटर किरन पांडेय, मरौचा में कटेहरी कोआर्डिनेटर अनीता यादव, शाहपुर औरांव में टांडा कोआर्डिनेटर इंद्रेश कुमार व मंसूरपुर में भीटी कोआर्डिनेटर पूनम देवी विकास कार्यों का सत्यापन करने पहुंचे।

लापरवाही व मनमानी की हद यह कि पूर्व में दी गई सूचना के बावजूद ग्राम पंचायत अधिकारी या ग्राम विकास अधिकारी में से कोई भी मौके पर नहीं दिखा। गाँरतलब है कि किसी गांव में ग्राम विकास अधिकारी तैनात हैं, तो किसी गांव में ग्राम पंचायत अधिकारी। इन दोनों के अलावा सोशल आडिट टीम को रोजगार सेवक भी नदारद मिले।

इसके चलते कोआर्डिनेटरों को विकास संबंधित आवश्यक कागजात भी नहीं मिल सके। इस पर टीम को बगैर सत्यापन किए ही वापस अपने अपने विकास खंड मुख्यालय लौट जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।  

कर्मचारियों की इस लापरवाही पर जल्द ही उनके विरुद्ध कार्रवाई तय हो सकती है। जिला सोशल आडिट कोआर्डिनेटर सुमन तिवारी ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम व सीडीओ को सौंपी जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्मचारियों के मौजूद न रहने तथा पत्रावलियों के उपलब्ध न होने की वजह से सभी संबंधित गावों में विकास कार्यों के आडिट का काम नहीं हो पाया।
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