लचर प्रबंधन के चलते शनिवार को भी जिले के ज्यादातर एटीएम बूथ पर ताले ही लटके रहे। इक्का-दुक्का एटीएम से ही शनिवार को भी धन निकासी हो पाई। एटीएम बूथों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइन पूरे दिन लगी रही। बैंक शाखाओं में धन निकासी व जमा करने को लेकर मारामारी का माहौल शनिवार को भी दिखाई पड़ा।
इस बीच ग्रामीण क्षेत्र की तमाम बैंक शाखाएं शनिवार को धनाभाव के संकट से जूझती रहीं। नतीजतन कहीं घंटों लेनदेन ठप था तो कहीं सिर्फ कुछ देर के लिए ही धननिकासी व जमा करने का कार्य हो पाया। कई जगहों पर समय से पहले ही बैंक शाखाएं बंद कर दी गईं। इसे लेकर भी उपभोक्ताओं में आक्रोश का माहौल व्याप्त रहा।
पुरानी बड़ी नोटों पर प्रतिबंध के बाद धनाभाव का संकट दूर होने की जो उम्मीद उपभोक्ताओं ने एटीएम सेवाओं के फिर से शुरू होने को लेकर लगा रखी थीं, वह दूसरे दिन भी धराशायी हो गई। गौरतलब है कि पुरानी बड़ी करेंसी पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार ने एक दिन बैंक तथा दो दिन एटीएम सेवाएं बंद रखने का एलान किया था।
बैंक तो गुरुवार से खुल गए लेकिन एटीएम सेवाएं शुरू होने का इंतजार सभी को था। घोषणा के अनुरूप शुक्रवार को एटीएम तक उपभोक्ताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ लेकिन लगभग 95 प्रतिशत एटीएम पर ताले ही लटके रहे। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार देर रात तक पैसे एटीएम में पड़ जाएंगे।
यह बात अलग है कि शनिवार को भी एटीएम तक पहुंचे उपभोक्ताओं के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। ज्यादातर एटीएम शनिवार को भी बंद थे। एक्सिस व एचडीएफसी बैंक के ही कुछ एटीएम चल सके। इन पर पूरे दिन उपभोक्ताओं की भारी भीड़ जुटी। इसे लेकर घंटों हंगामा भी होता रहा। उधर, एटीएम सेवाओं के शुरू न हो पाने का असर यह रहा कि शनिवार को भी बैंक शाखाओं में भारी भीड़ जुटी।
धन की निकासी व जमा करने के अलावा पुरानी बड़ी नोटों को बदलने के लिए भी उपभोक्ताओं को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अकबरपुर में भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में उपभोक्ताओं की भीड़ पूरे दिन बनी रही। यही हाल मुख्यालय की कई अन्य बैंक शाखाओं का भी रहा। धनाभाव के संकट से भी बैंक शाखाएं जूझती नजर आईं।
आलापुर प्रतिनिधि के अनुसार एसबीआई रामनगर की शाखा में शुक्रवार को जहां लगभग पूरे दिन धनाभाव था, वहीं शनिवार को शाम चार बजे के बाद धन की निकासी शुरू हुई। यूनियन बैंक रामनगर महुवारी से नियमानुसार चार हजार की निकासी करने के बजाये सिर्फ एक-एक हजार रुपये की निकासी धनाभाव के चलते की गई। जलालपुर के सभी बैंक शाखाओं में पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा।
जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में पुरानी बड़ी नोटों पर प्रतिबंध का साफ असर दिखने लगा है। शनिवार को सराफा कारोबार में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा जबकि अन्य व्यवसाय का भी यही हाल रहा। गौरतलब है कि पुरानी बड़ी नोटों पर प्रतिबंध लगने के तत्काल बाद तो घर में मौजूद रकम खपाने की हड़बड़ी के चलते सराफा कारोबार की जिले में भी खूब चांदी हुई।
हालांकि अगले दिन से ही गहनों की खरीद पर भी सरकार की तिरछी नजर को भांप कर बिक्री व खरीदारी दोनों का उत्साह ठंडा पड़ गया। इस बीच शुक्रवार को जहां आयकर विभाग की छापेमारी के डर से सराफा व अन्य व्यवसाय से जुड़ी अन्य दुकानें धड़ाधड़ बंद हो गईं, वहीं शनिवार को ज्यादातर दुकानें खुलीं तो जरूर लेकिन उन्हें ग्राहकों का इंतजार ही बना रहा।
सराफा कारोबारियों ने ऐसा सन्नाटा शायद ही इससे पहले कभी देखा हो। प्रसिद्ध सराफा व्यवसाई वीरेंद्र सेठ ने कहा कि दुकानें तो दिनभर खुली रहीं लेकिन इक्का-दुक्का ही ग्राहक पहुंचे। जलालपुर व टांडा प्रतिनिधियों के अनुसार सराफा की कई दुकानें ऐसी रहीं, जहां दिनभर ग्राहक न पहुंचने से उनका खाता ही नहीं खुला।
कुछ ऐसा ही हाल इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल व कपड़ा व्यवसाय के अलावा जनरल स्टोर तथा अनाज से जुड़ी दुकानों का भी रहा। ग्राहकों के कम आने के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी सभी दुकानों पर पूरे दिन सन्नाटे का माहौल रहा। इन सबके चलते बाजारों में भीड़ भी कम दिखी।