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मनमानी की भेंट चढ़ा आधा अधूरा एएनएम सेंटर

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राजेसुल्तानपुर। लाखों रुपये की लागत से बलरामपुर में बना मातृ शिशु कल्याण केंद्र (एएनएम सेंटर) ग्रामीणों के लिए मात्र छलावा साबित हो रहा है। मानक के अनुरूप निर्माण कार्य न होने तथा देखरेख के अभाव में एएनएम सेंटर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। न सिर्फ प्लास्टर टूटकर गिर रहा, वरन बारिश के चलते छत भी टपकती है। दरवाजा व खिड़की लगाए ही नहीं गए। बताया जाता है कि आधा अधूरा कार्य कराकर भुगतान भी करा लिया गया। केंद्र का संचालन न होने से विभिन्न गांवों की लगभग दस हजार आबादी को तगड़ा झटका लगा है।
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जहांगीरगंज विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत बलरामपुर में दशक भर पूर्व बना मातृ शिशु कल्याण केंद्र जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। इलाज की बात तो दूर की है, भवन अभी तक विभाग को हैंडओवर ही नहीं किया जा सका है। इसके अलावा निर्माण कार्य भी आधा अधूरा है। जिसमें दरवाजे व खिड़कियां आज तक नहीं लग सके। मानक के अनुसार कार्य न होने तथा देखरेख के अभाव में दीवार के प्लास्टर टूट कर गिरने लगे हैं। छत भी बारिश के दौरान टपकता है। मनमानी का आलम यह है कि निर्माण इकाई व ठेकेदार की मिलीभगत से आधे अधूरे कार्य का भुगतान भी करा लिया गया है।
हालांकि एएनएम सेंटर का संचालन कराने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। इससे बलरामपुर समेत कई अन्य गांवों की लगभग दस हजार आबादी के बेहतर व सुगम इलाज के सपने को तगड़ा झटका लगा है। स्थानीय विनोद प्रजापति, अंगद सोनकर, नंदकिशोरी यादव, मुसाफिर सोनकर, राधेश्याम, मोनू मोदनवाल आदि का कहना है कि केंद्र का संचालन न होने से प्रसव के दौरान महिलाओं को पड़ोसी जनपद आजमगढ़ के महाराजगंज ले जाना पड़ता है। जिसकी दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। जबकि सीएचसी जहांगीरगंज की दूरी लगभग 17 किलोमीटर पड़ जाती है। ऐसे में समय से इलाज नहीं हो पाता। जिससे प्रसव के दौरान महिलाओं की जिंदगी जोखिम भरी बनी रहती है।
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जहांगीरगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. उदय चंद यादव ने बताया कि भवन का कार्य अधूरा होने के चलते विभाग द्वारा हैंडओवर नहीं लिया गया है। इसकी सूचना विभाग को दी जा चुकी है।
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