प्रदेश सरकार की अतिमहत्वपूर्ण हौसला पोषण योजना जिले में परवान नहीं चढ़ सकी है। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती पहुंच ही नहीं रही हैं। नतीजतन जच्चा-बच्चा को पौष्टिक आहार दिलाने की जो कोशिश सरकार ने शुरू की थी, वह यहां खुद पंगु पड़ गई है। अमर उजाला टीम ने सोमवार को कई आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया तो कहीं ताला बंद मिला तो कहीं महिलाएं ही नदारद थीं।
जाहिर तौर पर प्रचार-प्रसार के अभाव तथा विभाग द्वारा समुचित रुचि न दिखाए जाने का ही नतीजा इस महत्वपूर्ण योजना की बदहाली के तौर पर सामने आया है। गौरतलब है कि 15 जुलाई 2016 को प्रदेश सरकार ने व्यापक तामझाम से हौसला पोषण योजना की शुरुआत की थी।
इसमें गर्भवती के साथ ही छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के अतिकुपोषित बच्चों को विशेष आहार दिए जाने का निर्णय लिया गया था। शुरुआती दौर से ही लड़खड़ाती चली यह योजना अभी परवान नहीं चढ़ सकी है। जिले में कुल 2548 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 2249 आंगनबाड़ी तथा 299 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। कुल 26 हजार 541 गर्भवती तथा 12 हजार 186 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं।
योजना के तहत गर्भवती व बच्चों को केंद्रों पर भोजन के साथ फल, दही तथा आधा किग्रा घी दिए जाने का प्रावधान है। गर्भवती को आयरन की गोली भी यहां दी जानी चाहिए। यह बात अलग है कि केंद्रों पर इन योजनाओं का लाभ आमतौर पर न तो गर्भवती को मिल पा रहा है और न ही अतिकुपोषित बच्चों को।
योजनाओं की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला टीम ने सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया तो वहां पसरी मनमानी साफ उजागिर हुई। अक्सर बंद रहने वाला अवसानपुर आंगनबाड़ी केंद्र सोमवार को भी पूर्व की तरह बंद मिला। पूर्वाह्न 11 बजे तक गेट का दरवाजा नहीं खुल सका था। ग्रामीण सुरेश व रामपाल ने बताया कि यह केंद्र कब खुलता है, इसकी जानकारी उन लोगों को नहीं हो पाती।
यह भी बताया कि न तो केंद्र पर कार्य करने वाली कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को किसी प्रकार से जागरूक किया जाता है और न ही केंद्र से योजनाओं का लाभ ही पात्रों को मिलता है। हौसला पोषण योजना के तहत अब तक इस केंद्र पर गर्भवती व कुपोषित बच्चों को भोजन नहीं मिल सका है। अमर उजाला टीम साढ़े 11 बजे बड़ागांव केंद्र पर पहुंची तो गेट पर ताला जड़ा मिला।
यहां मिले ग्रामीण विजय व सतीश ने बताया कि कभी-कभार ही केंद्र का ताला खुलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कभी-कभार यहां आती हैं। कार्यकर्ता द्वारा न तो गर्भवती और न ही कुपोषित बच्चों को केंद्र तक पहुंचाने के लिए किसी प्रकार का अभियान चलाया जाता है। हौसला पोषण योजना के तहत अब तक इस केंद्र पर भोजन नहीं दिया जा सका है।
इसकी शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई लेकिन कभी गंभीरता नहीं दिखाई गई। आंगनबाड़ी केंद्र केशवपुर का ताला खुला था। अंदर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका मौजूद मिलीं लेकिन न तो गर्भवती थीं और न ही कुपोषित बच्चे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सोनादेवी व सहायिका प्रमिला ने बताया कि हौसला पोषण योजना के तहत भोजन बनाया जाता है।
इसके लिए गर्भवती को बुलाया भी जाता है लेकिन इक्का-दुक्का महिलाएं ही आती हैं। बताया कि अन्य योजनाओं का गर्भवती व कुपोषित बच्चों को समुचित लाभ दिलाया जाता है। अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि लगभग 70 प्रतिशत केंद्रों पर व्यवस्था पूरी तरह लागू है। अन्य केंद्रों पर भी इसे प्रभावी बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। तमाम प्रचार-प्रसार के बाद भी 10 में से तीन गर्भवती ही केंद्रों पर आती हैं। आगे इसे और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।