प्रदेश सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक कन्या विद्या धन योजना का मेधावी छात्राओं को लाभ दिलाने की प्रक्रिया में कई संशोधन किए गए हैं। पूर्व में इस योजना का लाभ दिलाने के लिए छात्राओं का चयन जिला स्तर पर किया जाता था।
विद्यालयों द्वारा भेजी गई छात्राओं की सूची का सत्यापन जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाती थी। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जाती थी। अक्सर तमाम मेधावी छात्राएं इससे वंचित रह जाती थीं, जबकि तमाम अपात्रों को योजना का लाभ मिल जाता था। इसकी शिकायतें भी होती थीं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
योजना का पात्र छात्राओं को लाभ दिलाने के लिए इस बार शासन ने चयन प्रक्रिया में कई संशोधन किए हैं। एक दिन पूर्व गुरुवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि इस बार मेधावी छात्राओं की सूची शासन स्तर पर तैयार की जाएगी।
कहा गया कि यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व आईसीएसई बोर्ड की मेधावी छात्राओं के इंटरमीडिएट में प्राप्तांक के अवरोही क्रम में रखकर सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को डीएम की अध्यक्षता में गठित टीम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इनके माध्यम से सूची में चयनित छात्राओं का सत्यापन संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों द्वारा कराया जाएगा। कहा गया कि 75 प्रतिशत धनराशि में से यूपी बोर्ड की छात्राओं को लाभान्वित किया जाएगा, जबकि 25 प्रतिशत की धनराशि में से सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड की छात्राओं को मदद दी जाएगी। जो सूची शासनस्तर पर तैयार की जाएगी, उसमें 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक व 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति व जनजाति की छात्राएं होंगी।