बात 14 अगस्त 2000 की है। बाराबंकी जनपद में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में हुए बम धमाके में अंबेडकरनगर के दो आरोपियों के नाम सामने आये थे। उन्हें आगरा जीआरपी ने पकड़ा था। दोनों के साथ ही जम्मू-कश्मीर निवासी एक आरोपी भी पकड़ा गया था। इसके बाद पांच जुलाई 2005 को अयोध्या के रामजन्म भूमि परिसर के निकट हुए धमाके में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पांच आतंकी घटना से पहले अंबेडकरनगर में ही रुके थे। यहीं से वे अयोध्या पहुंचे थे। इन दो आतंकी घटनाओं के बाद से जिला पूरे देश में चर्चा में आ गया था। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने के बाद मिले इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर जांच का दायरा अंबेडकरनगर की तरफ बढ़ा दिया है।
आतंकियों ने किराए पर लिया था घर
राममंदिर को निशाना बनाने वाले पांच आतंकी अकबरपुर रेलवे स्टेशन के निकट शहजादपुर में किराए का कमरा लेकर रुके थे। यहां उन्हाेंने खुद को फेरीवाला बताया था। यहीं से उन्होंने अयोध्या पहुंचकर कई बार रेकी की। पांच जुलाई 2005 को आतंकी अकबरपुर से निकलकर टैक्सी से अयोध्या पहुंचे थे। वहां उन्होंने बस स्टेशन से एक मार्शल जीप किराए पर ली और रामजन्म भूमि थाने से होते हुए मंदिर परिसर के निकट सुरक्षा घेरे तक पहुंच गए। इसके बाद स्थानीय गाइड रमेश पांडेय को गाड़ी में बांधकर विस्फोटक से उड़ा दिया। दो स्थानीय लोग भी इसमें मारे गए थे। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने यहां ताबड़तोड़ कार्रवाई की।
संवेदनशील हैं जिले के कई क्षेत्र
सुरक्षा को लेकर जिले के अलीगंज, टांडा, हंसवर, बसखारी, हीरापुर, अकबरपुर, जलालपुर संवेदनशील माने जा रह हैं। किछौछा में अक्सर बाहरी प्रदेशों के लोगों का आना-जाना होता है। इसे देखते हुए भी इन क्षेत्रों में चौकसी बरती जा रही है।