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अंबेडकनगर हत्याकांड: कातिल आमिर को कब्रिस्तान में नहीं मिली जगह, घाट किनारे बिना दुआ-फातिहा के हुई आखिरी विदाई

Tue, 05 May 2026 08:18 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, अंबेडकरनगर

सार

अंबेडकरनगर हत्याकांड के आरोपी की मौत के बाद परिजनों और समाज ने उससे दूरी बना ली। शव को कब्रिस्तान में जगह नहीं मिली और अंततः पुलिस की मौजूदगी में घाट किनारे दफनाया गया। घटना ने समाज में अपराध के प्रति गुस्से और बहिष्कार की कठोर तस्वीर सामने रखी है।
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आरोपी आमिर का शव लेने से इनकार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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चार मासूम बच्चों और उनकी मां की निर्मम हत्या के आरोपी आमिर का अंत भी उतना ही भयावह और अकेला साबित हुआ जितना उसका अपराध। एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उसे न अपनों का सहारा मिला, न समाज की सहानुभूति। जिंदगी भर जिन रिश्तों के बीच रहा, मौत के बाद वही रिश्ते उससे मुंह मोड़ गए।

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मीरानपुर के कसाईबाड़ा निवासी आमिर के शव को पोस्टमार्टम के बाद लेने से उसके अपने परिजनों ने ही इनकार कर दिया। पिता जान मोहम्मद का साया पहले ही उठ चुका था। मां के अलावा तीन भाई हैं। 

तीन अविवाहित बहनें हैं और एक की मौत हो चुकी है। पूरा परिवार मांस बिक्री का काम करता है। मां, भाई-बहनों का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद कोई उसे अपनाने को तैयार नहीं था। उसके गुनाह इतने भारी थे कि रिश्तों की डोर भी टूट गई।

 

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गांव में शव पहुंचे तो लोग रो पड़े। - फोटो : amar ujala

सामाजिक बहिष्कार तक की बातें होने लगीं

भाई सैफी, चाचा ताज मोहम्मद समेत परिवार के अन्य लोगों ने अन्य परिजनों ने साफ कह दिया कि वे इस कलंक को अपने साथ नहीं जोड़ सकते। आसपास के लोगों में भी आक्रोश इतना था कि जिसने भी अंतिम संस्कार की हिम्मत दिखाई, उसके सामाजिक बहिष्कार तक की बातें होने लगीं। 

यह सिर्फ एक व्यक्ति का अंत नहीं था, बल्कि समाज का कठोर निर्णय भी था। आखिरकार पुलिस के समझाने-बुझाने पर देर रात परिजन शव लेने को राजी तो हुए लेकिन उसे घर तक लाना भी मुनासिब नहीं समझा। जैसे वह पहले ही उनके दिलों से दफन हो चुका हो।

 

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वारदात से परिजन बदहवास हैं। - फोटो : amar ujala

शिवाला घाट पर दफनाया

पोस्टमार्टम हाउस से सीधे शहजादपुर के इमामबाग कब्रिस्तान ले जाया गया लेकिन उसे यहां भी जगह नहीं मिली। मानो जमीन का एक टुकड़ा भी उसे स्वीकार करने को तैयार न हो। अंततः पुलिस की मौजूदगी में जौहरडीह शिवाला घाट पर उसे दफनाया गया।

बिना किसी रस्म, बिना किसी दुआ- फातिहा और बिना किसी आखिरी विदाई के। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ गलतियां सिर्फ जिंदगी ही नहीं छीनतीं, बल्कि मौत के बाद मिलने वाली इज्जत भी खत्म कर देती हैं। आमिर की कहानी इसी दर्दनाक सच्चाई की एक मिसाल बन गई है।
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