अंबेडकरनगर। अयोध्या की 84 कोसी सांस्कृतिक व धार्मिक परिधि में शामिल होने के चलते अंबेडकरनगर के मठ मंदिरों के भी दिन बहुरने की उम्मीद हो चली है। दरअसल अयोध्या से सटा यह जनपद अयोध्या से निकलने वाली 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र में शामिल है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण शुरु होने के साथ ही श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास बढ़ चला है कि केन्द्र व राज्य सरकार परिक्रमा क्षेत्र में शामिल मठ मंदिरों को लेकर जल्द ही कोई योजना सामने लाएगी।
बताते चलें कि देश भर में आस्था के अगाध केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध अयोध्या की सांस्कृतिक व धार्मिक सीमा कई जनपदों तक फैली हुई है। त्रेतायुग में अयोध्या का राज मौजूदा समय में कई जनपदों में विभक्त हो चुके क्षेत्र तक फैला था। अयोध्या की सांस्कृतिक व धार्मिक सीमाएं काफी विशाल थीं। लगभग 84 कोस तक इसकी सीमा फैली हुई थी। इसके दायरे में अंबेडकरनगर जनपद भी शामिल है।
यहां के तमाम मठ मंदिर का जुड़ाव सीधे तौर पर अयोध्या से रहा है। दशकों पूर्व तक जहां तमाम साधू संत 84 कोसी परिक्रमा में शामिल अयोध्या, अंबेडकरनगर, बाराबंकी व गोंडा आदि क्षेत्रों में शामिल मठ मंदिरों तक जाते रहे, वहीं अब यह जिम्मा विश्व हिन्दू परिषद ने संभाल रखा है। संगठन की तरफ से बकायदा 84 कोसी परिक्रमा निकाली जाती रही है। संतों की अलग अलग टोली विभिन्न जनपदों में जाकर धर्म जागरण का जिम्मा निभाती आ रही है।
इस बीच अब जबकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरु हो रहा है तब अयोध्या की सांस्कृतिक व धार्मिक सीमा में शामिल अंबेडकरनगर जनपद के धार्मिक स्थलों के भी दिन बहुरने के उम्मीद हो चले हैं। इसमें पवित्र शिवबाबा धाम, श्रवणक्षेत्र धाम, अकबरपुर नगर का शहजादपुर शिवालय घाट, गोविंद साहब मठ, मंशापुर कुटी आदि दर्जनों धार्मिक मठ व मंदिर शामिल हैं। इन सभी धार्मिक स्थलों के व्यापक सौन्दर्यीकरण की जरूरत है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि इन क्षेत्रों में आकर्षक लाइटिंग, पौधरोपण, फुलवारी निर्माण, रैनबसेरे, जल निकासी, पेयजल सुविधा तथा फौव्वारे आदि के निर्माण से निश्चित रूप से अयोध्या के 84 कोस परिधि में शामिल धार्मिक क्षेत्र का महत्व बढ़ेगा। न सिर्फ पर्यटक इन क्षेत्रों के प्रति आकर्षित होंगे, वरन क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेंगे। श्रद्धालुओं के अनुसार निश्चित रूप से केन्द्र व राज्य सरकार इस बारे में जल्द ही कोई विशेष पैकेज ला सकती है।
पवित्र श्रवणक्षेत्र धाम को पर्यटक स्थल घोषित किया गया है। यहां मड़हा व बिसुही नदी के संगम तट पर राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण चलाया था जो मातृ पितृ भक्ति के प्रतीक श्रवण कुमार को जा लगा था। दिव्यांग माता पिता को तीर्थ यात्रा कराने निकले श्रवण कुमार की तीर लगने से जान चली गई थी, जबकि इसी वियोग में उनके माता पिता ने भी राजा दशरथ को पुत्र वियोग में मृत्यु का श्राप देते हुए प्राण त्याग दिया था। इस स्थल पर वर्ष में एक बार पांच दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता, जबकि अन्य धार्मिक मौकों पर स्नान आदि का दौर चलता है।
पंचकोसी परिक्रमा भी यहीं से शुरु होती है। इसी तरह पवित्र शिवबाबा धाम को भी पर्यटक स्थल घोषित किया गया है। यह क्षेत्र प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को भव्य मेले का गवाह बनता है। इसके बावजूद इन दोनों स्थानों पर पर्यटन की दृष्टि से समुचित विकास नहीं हो पाया है। इससे श्रद्धालुओं को अक्सर विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही जरूरत पूर्वांचल के प्रसिद्ध क्षेत्र गोविंद साहब मठ में बनी हुई है। जहां वर्ष में एक बार माह भर चलने वाले मेले का आयोजन होता है। शहजादपुर शिवालय घाट को भी पर्यटक स्थल घोषित करने के बाद उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।