आरक्षण को लेकर मचे घमासान के बाद अब नई अधिसूचना ने नगर निकायों में बड़ा उथल-पुथल कर डाला है। कई बड़े चेहरे दौर से बाहर हो गए हैं। अकबरपुर नगर परिषद व किछौछा नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट अनारक्षित हो गई है।
टांडा नगर पालिका व राजेसुल्तानपुर नगर पंचायत अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। जलालपुर नगर पालिका व इल्तिफातगंज नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट ओबीसी महिला जबकि जहांगीरगंज नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुई है।
नगर निकायों में पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग का गठन कर सर्वे कराए जाने से बीते दिनों चुनाव टल गया था। उस समय सभी निकायों के लिए घोषित आरक्षण को बाद में रद्द करना पड़ा था।
आयोग की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद अब गुरुवार को राज्य सरकार के नगर विकास अनुभाग ने नए सिरे से निकायों में अध्यक्ष पद के आरक्षण की घोषणा कर दी। सूची घोषित होते ही अचानक शहरी क्षेत्रों में सरगर्मी बढ़ गई। सूची ने एक तरफ जहां कई दावेदारों के चेहरे खिला दिए तो वहीं कई दावेदारों को मायूस होना पड़ा है।
अकबरपुर नगर पालिका की सीट साढ़े तीन माह पूर्व ओबीसी के लिए आरक्षित घोषित होने से दौड़ से बाहर हुए सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मिश्र, कांग्रेस नेता ललित मोहन श्रीवास्तव तथा भाजपा नेता सुधीर श्रीवास्तव उर्फ दिलदार के समर्थकों के चेहरे खिल गए। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई।
इनमें से अनिल व सुधीर ने तो बीते दिनों सीट के ओबीसी आरक्षित हो जाने पर सोशल मीडिया के माध्यम से साजिश तक रचने का आरोप लगाया था। अब यह सीट सामान्य हो गई है। जलालपुर नगर पालिका की सीट बीते दिनों महिला के लिए आरक्षित की गई थी। अब पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। इससे भाजपा नगर अध्यक्ष संजीव मिश्र व सामाजिक कार्यकर्ता शिवराम मिश्र के परिजनों द्वारा चुनाव लड़ने के लिए की गई तैयारियों पर ग्रहण लग गया है।
टांडा नगर पालिका की सीट साढ़े तीन माह पहले अनारक्षित घोषित हुई थी। इसके चलते वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता धर्मवीर सिंह बग्गा, भाजपा नेता दीपक केडिया, सपा नेता मुजीब अहमद सोनू व बसपा से भाजपा में शामिल हुए महमूद आलम खान ने पूरी मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। अब पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित हो जाने से इन सबकी तैयारियों पर अचानक ब्रेक लग गया। अन्य निकायों में भी इसी तरह कहीं खुशी, कहीं गम देखने को मिला है।