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लोकसभा चुनाव कराने वाले एडीएम का स्थानांतरण

Fri, 10 Feb 2017 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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ट्रांसफर - फोटो : symbolic
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चुनाव आयोग द्वारा तीन वर्ष से जमे तथा लोकसभा चुनाव में भी तैनात रहे अफसरों को हटाए जाने के निर्देश की जद में जिले के 15 से अधिक अफसर आ रहे हैं। एआरटीओ तो पिछले विधानसभा चुनाव में भी यहां थे जबकि बीच में स्थानांतरण के बाद वे इस समय फिर यहां तैनात हैं। जाहिर तौर पर एआरटीओ समेत लगभग 15 अफसरों पर स्थानांतरण की तलवार लटक गई है।
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इस बीच जिले में लंबे समय से तैनात रहे एडीएम का स्थानांतरण आयोग ने गैर जनपद कर दिया है। गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने बीते दिन लखनऊ दौरे के समय निर्देश दिया था कि जो अफसर लंबे समय से एक जिले में तैनात हैं, उन्हें वहां से हटाया जाए।

इसमें तीन वर्ष या इससे अधिक समय से एक ही जिले में तैनात अफसरों के अलावा बीते लोकसभा चुनाव में तैनात रहे अफसर भी शामिल हैं। इसके बाद से ही ऐसे अफसरों पर स्थानांतरण की तलवार लटकने लगी है। दरअसल जिले में भी कई ऐसे अफसर हैं जो लंबे समय से यहां जमे हैं।
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इनमें प्रभागीय वनाधिकारी एके शुक्ल, अधिशाषी अभियंता विद्युत मुकेश बाबू, प्रभारी खाद्य एवं विपणन अधिकारी अविनाश झा, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अश्विनी कुमार, जिलापूर्ति अधिकारी सै. उबैदुर्रहमान, जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी जेपी सिंह, अपर सीएमओ डॉ. जीआर चंद्रा, डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. सालिकराम, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. ओपी गुप्ता, डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीराम व डॉ. हेमंत कुमार लंबे समय से जिले में तैनात हैं। 

ये सभी अधिकारी पिछले लोकसभा चुनाव में भी यहां तैनात थे और अब विधानसभा चुनाव संपन्न कराने में अपना योगदान दे रहे हैं। इनके अलावा अपर जिलाधिकारी रामसूरत पांडेय भी गत लोकसभा चुनाव में यहां तैनात थे और इस बार विधानसभा चुनाव में भी लगे थे। हालांकि एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने उन्हें यहां से स्थानांतरित करते हुए प्रतीक्षारत कर दिया है।

उनके स्थान पर मनोज कुमार यहां नए अपर जिलाधिकारी बनाए गए हैं। एडीएम के स्थानांतरण के साथ ही अब कई अन्य अफसरों पर भी तबादले की तलवार लटकने लगी है। जिले में तैनात एआरटीओ अशोक कुमार का मामला तो सबसे जुदा है। वे गत विधानसभा चुनाव में यहां तैनात थे। चुनाव के कुछ दिनों बाद उनका स्थानांतरण अलीगढ़ कर दिया गया। वे यहां से कार्यमुक्त भी हो गए थे।

हालांकि कुछ समय बाद एक बार फिर से वे यहां तैनाती पाने में कामयाब रहे। ऐसे अफसरों को लेकर आयोग की नजर सबसे ज्यादा तिरछी है। अब आयोग के निर्देश के अनुरूप इनका स्थानांतरण नहीं हुआ तो जाहिर तौर पर वह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव एक ही जिले में कराएंगे।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि जो भी अफसर चुनाव से सीधे जुड़े हैं और आयोग के दिशा-निर्देशों की जद में आते हैं, उनका स्थानांतरण पहले ही हो चुका है। ऐसा कोई अफसर जिले में नहीं है, जिसकी तैनाती से आयोग के किसी भी निर्देश का उल्लंघन होता हो।  
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