अंबेडकरनगर। टांडा कोतवाली में छह साल पहले दर्ज हुए दहेज उत्पीड़न, मारपीट, धमकी तथा एससी/एसटी एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। साथ ही झूठा मुकदमा लिखाने के लिए मामले महिला पर मुकदमा चलाने और समाज कल्याण विभााग की ओर से प्राप्त धनराशि को वापस करने का आदेश दिया है।
टांडा के ग्राम कोरई मोहद्दीनपुर की सन्नो देवी ने जुुलाई 2019 में एसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसकी शादी अकबरपुर के बरियावन निवासी राकेश कुमार के साथ टांडा कोतवाली में संपन्न हुई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि पति राकेश, ससुर रामप्रकाश, सास सरितता देवी, ननद संजू उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हैं। दो जुलाई 2019 को मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया था। इस मामले में एसपी के आदेश पर टांडा पुलिस ने केस दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कोर्ट में चली। कोर्ट ने महिला ने ने शपथ पर दिए बयान में सभी आरोपों से साफ इन्कार कर दिया।
प्राथमिकी लिखवाने के पीछे उसने पारिवारिक विवाद व बहन के कहने पर मुकदमा लिखवाने की बात कही। डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार वादिनी को कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई, केवल दर्द की शिकायत थी, जिससे गंभीर मारपीट के आरोप अविश्वसनीय पाए गए। न्यायाधीश रामविलास सिंह ने टिप्पणी की कि झूठे मुकदमों के कारण निष्पक्ष न्याय व्यवस्था प्रभावित होती है। कोर्ट ने आदेश दिए कि वादिनी एक माह के भीतर सरकार से प्राप्त सभी आर्थिक सहायता की राशि समाज कल्याण विभाग में वापस जमा करें।