अंबेडकरनगर। बारिश का सटीक आकलन न हो पाने से अतिवृष्टि और सूखे की स्थिति में किसानों को फसल बीमा का लाभ मिलने में देरी होती है। किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अब हर ग्राम पंचायत भवन पर वर्षामापी यंत्र लगाए जाएंगे। इसी के साथ मौसम के सटीक आंकलन के लिए ब्लॉक कार्यालयों पर ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जो मौसम में होने वाले उतार चढ़ाव की जानकारी मुहैया कराएगा। इसके आधार पर किसान अपनी फसलों को नुकसान से बचा सकेंगे।
बता दें कि जिले में चार लाख से ज्यादा किसान और उनके परिवारों की आजीविका खेतीबाड़ी पर निर्भर है। किसान मेहनत से फसलें तैयार करते हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या मौसम की सटीक जानकारी न मिलने से आती है। इसके लिए अयोध्या के कृषि विश्वविद्यालय या लखनऊ से आने वाले आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है। ओलावृष्टि, अतिवृष्टि एवं सूखे की स्थिति में फसल बीमा का लाभ क्रॉप सर्वे के आधार पर ही मिल पाता है। सिर्फ उन्हीं इलाकों को त्वरित सहायता मिलती है, जहां क्षति 50 प्रतिशत से अधिक हो। इस समस्या के निदान के लिए भारत सरकार की पहल पर हर ग्राम पंचायत स्तर पर बारिश का पता लगाने के लिए पंचायत भवन पर वर्षामापी यंत्र की स्थापना की जाएगी। इसके लिए भारत सरकार से नामित कंपनी के सदस्यों ने गांव-गांव सर्वे कार्य शुरू किया है। सदस्य ग्राम प्रधान व सचिव से ओटीपी लेकर सत्यापन कर रहे हैं। संवाद
चिप से होगी रिपोर्ट
वर्षामापी यंत्र में हर पंचायत भवन की छत पर एक 10 से 12 फीट का एक एंटीना लगाया जाएगा, जिसका चार फिट की परिधि में लोहे के जाल से घेराव किया जाएगा। इसको बिजली मुहैया कराने के लिए सोलर पैनल लगाया जाएगा, इससे मिलने वाली सूचना चिप के माध्यम से कंपनी के पास रिकॉर्ड होगी।
ऐसे काम करेगा एडब्ल्यूएस
स्वचालित मौसम केंद्र या ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) मुख्य रूप से तापमान, हवा की गति, दिशा, वर्षा, आर्द्रता, वायुमंडलीय दबाव इत्यादि को रिकॉर्ड करेगी। इसके लिए इसमें सेंसर शेल्टर, वर्षामापी, डेटा-लॉगर/नेटवर्क समेत अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। इसमें सभी बिंदुओं पर दैनिक रिपोर्ट भी प्राप्त हो सकेगी।
होगी असानी
वर्षामापी यंत्र और स्वचालित मौसम केंद्र लगने से बारिश व मौसम का सटीक आकलन हो सकेगा। इससे किसानों को समय से जागरूक किया जा सकेगा और फसल बीमा के लिए आंकड़े पहले से मौजूद रहेंगे।
- डॉ. अश्विनी सिंह, उपनिदेशक कृषि