भीटी क्षेत्र के पशुओं में गलाघोंटू की बीमारी काफी तेजी से फैल रही है। पशु पालन विभाग द्वारा अभी तक टीकाकरण अभियान नहीं है। पशुओं में तेजी से फैल रही इस बीमारी से पशुपालकों में हड़कंप है। यह बीमारी पशुओं में संक्रमण से फैलती है। इस बीमारी की चपेट में आने से पशु अधिकतम दो से तीन दिन ही जीवित रह पाता है।
काफी तेजी से इस बीमारी के विषाणु पशुओं पर अटैक करते हैं। इसमें पशु चारा नहीं खा पाते हैं। गला घोंटू की इस घातक बीमारी से टेमा गांव के रामउजागिर व पतिराम के बैल, रमाशंकर सिंह की भैंस, रामपियारे सिंह की बछिया सहित करीब एक दर्जन मवेशी मर चुके हैं।
क्षेत्र के समरसिंहपुर, समंथा, अढ़नपुर, चंदापुर आदि गांव भी प्रभावित हैं। पशु पालकों ने पशु चिकित्सा विभाग पर मनमानी का आरोप लगाया है। कहा कि लंबे समय से गांवों में टीकाकरण अभियान नहीं चला है।
पहले जहां मौसम में परिवर्तन होता था तो पशु चिकित्सकों की टीम गांव में पहुंचकर पशुओं का निशुल्क टीकाकरण करती थी, लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिखता है। गांव के रामभरोसे ने बताया कि भीटी पशु चिकित्सालय पर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं है।
यहां पर कटेहरी पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ दिनेश को संबद्ध किया गया है। वह यहां एक-दो दिन ही दिखाई पड़ते हैं। बाकी के दिन चिकित्सालय खाली ही पड़ा रहता है। इससे लोगों को भीटी पशु चिकित्सालय का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उधर चिकित्सक डॉ दिनेश का कहना है कि समय समय पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।