अंबेडकरनगर। शीतलहर व बारिश से गुरुवार को पूरे दिन लोग ठिठुरते नजर आए। सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा। इसके बाद हुई बारिश से ठंड और बढ़ गई। बारिश के चलते जिले की छोटी बड़ी बाजारों में जहां आमतौर पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं ठंड से बचने के लिए लोग चाय की चुस्कियां लेते दिखे। व्यापारी दुकानों के पास अलाव की व्यवस्था कर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे, तो अधिकांश लोगों ने अपने को घरों में ही कैद रखा। उधर, शासन के निर्देश के बाद भी अधिकांश निजी विद्यालय खुले रहे। इससे कड़ाके की ठंड में भी ठिठुरते हुए नन्हे मुन्नों को स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। विद्यालय बंद नहीं होने पर अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जताई है।
बीते तीन दिन से हो रही हाड़कंपाऊ ठंड का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। गुरुवार सुबह जब लोग सोकर उठे, तो चारों तरफ घना कोहरा पाया। समय बीतते बीतते ठंडी हवा चलने लगी। इससे ठंड का प्रकोप और भी बढ़ गया। कुछ देर बाद अचानक आसमान पर काले बादल छा गए और देखते ही देखते बारिश होने लगी। दोपहर तक हुई बारिश से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। जिले की छोटी बड़ी बाजारों में सन्नाटे का आलम रहा। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने जहां नगरीय क्षेत्रों की तरफ रुख नहीं किया, वहीं शहरी क्षेत्र के लोगों ने भी कड़ाके की ठंड को देखते हुए अपने घरों से निकलना मुनासिब नहीं समझा। मात्र आवश्यक कार्य के लिए ही लोग अपने घरों से निकले।
उधर कड़ाके की ठंड के बावजूद जिले के अधिकांश निजी विद्यालय गुरुवार को भी खुले रहे। इन विद्यालयों के प्रबंधन को शासन के उस निर्देश का पालन करने की भी सुध नहीं है, जिसमें 10 जनवरी तक जूनियर हाईस्कूल तक की कक्षाओं को बंद रखने का निर्देश दिया गया था। निर्देश का पालन कराने को लेकर चूंकि जिला प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है, इसलिए इसका लाभ निजी विद्यालय प्रबंधन उठा रहा है। उसे नन्हे मुन्नों के स्वास्थ्य की कोई फिक्र नहीं है। एक-दूसरे की होड़ में विद्यालय को खोल रखा है। नतीजतन शिक्षकों की डांट सुनने से बचने के लिए छात्र-छात्राओं को विद्यालय जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अधिकांश निजी स्कूलों के खुले रहने एवं इसे बंद कराने के लिए प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने को लेकर अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ सकता है। अभिभावकों ने अविलंब ऐसे विद्यालयों को बंद कराने की मांग की है।