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धनाभाव के चलते अधर में महत्वाकांक्षी योजनाएं

Tue, 07 Jan 2014 05:45 AM IST
AmbedkarNagar
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अंबेडकरनगर। जिले में महत्वपूर्ण परियोजनाओं के निर्माण को लेकर जिम्मेदार लोग बेफिक्र बने हुए हैं। जिला कारागार, अत्याधुनिक सर्किट हाउस, लोहिया भवन, ऑफीसर्स हास्टल का कार्य आधा-अधूरा पड़ा है। कई और परियोजनाएं ऐसी हैं, जिन्हें शासन से आवश्यक रकम मिलने का इंतजार है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि विकास की जो गति जिले में होनी चाहिए थी, वह अब तक सामने नहीं आ सकी है। प्रमुख मार्गों के निर्माण को लेकर भी यही रवैया सामने आया है। ले-देकर इसका खामियाजा जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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विकास के मामले में जनपदवासियों को आमतौर पर दो वर्षों में निराशा ही हाथ लगी है। एकमात्र टांडा कलवारी घाट पुल को छोड़ दिया जाए, तो कोई बड़ी उपलब्धि लगभग 23 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र को नहीं लग सकी है। ज्यादातर प्रमुख परियोजनाएं धनाभाव का शिकार हैं। जनप्रतिनिधियों को इस तरफ ध्यान देने की फिक्र नहीं, तो प्रशासन की तरफ से भेजे जाने वाले पत्र शायद गंभीरता से लिए नहीं जा रहे। नतीजतन राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज को 530 लाख रुपये की जरूरत है, लेकिन अवमुक्त हुए 378.57 लाख। धन खर्च होने के बाद से कोई रकम नहीं निर्गत हो सकी है। लोहिया भवन को 13 करोड़ की दरकार है, तो सिर्फ साढ़े चार करोड़ के बाद मुंह फेर लिया गया है। यहां काम बंद पड़ा है। राजकीय पॉलीटेक्निक ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी को 12.54 करोड़ की दरकार है। लगभग सात लाख रुपये मिले थे, जो खर्च हो चुके हैं। यहां भी धनाभाव में कार्य ठप पड़ा है। जिला कारागार के निर्माण में धन का संकट तो नहीं, लेकिन फिर भी कार्य न होने के बराबर ही है। अत्याधुनिक सर्किट हाउस का निर्माण डेढ़ करोड़ रुपये के चलते ठप पड़ा है। कांशीराम इंजीनियरिंग कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी को 92 करोड़ की जरूरत है, लेकिन 70 करोड़ ही अवमुक्त हो सके हैं। सिर्फ सवा करोड़ रुपये के लिए जिला मुख्यालय पर ऑफीसर्स हास्टल का निर्माण कार्य भी नहीं हो पा रहा है। भीटी तहसील में आवासीय भवन भी धनाभाव का शिकार हो गया है, तो जिला मुख्यालय पर जूडो हाल, वेट लिफ्टिंग हाल व तरणताल की यही दशा है।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज भीटी व राजकीय कन्या इंटर कॉलेज टांडा के निर्माण के लिए भी पूरा धन अवमुक्त नहीं हो पा रहा है। विभिन्न मॉडल स्कूलों का भी यही हाल है। दोस्तपुर अकबरपुर मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए 19 करोड़ के सापेक्ष पांच करोड़ मिला है। जिससे कार्य अधूरा पड़ा है। अलीगंज चिंतौरा मार्ग, टांडा बलुआजलाकी मोहिउद्दीनपुर संपर्क मार्ग व टांडा हंसवर आरोपुर मार्ग भी धनाभाव का शिकार है। ऐसा नहीं कि इन निर्माण कार्यों को लेकर समय-समय पर आवाज न उठ रही हो। कहीं सड़क को लेकर धरना-प्रदर्शन होता है, तो कहीं विद्यालयों का निर्माण आधा-अधूरा पड़े होने से छात्र-छात्राओं को मुश्किल हो रही है। इसके बावजूद शासन व प्रशासन इन सबको लेकर मौन है।
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