अंबेडकरनगर। जिले में मनरेगा मजदूरों की उम्मीदों पर अभी भी खरी नहीं उतर पा रही है। कारण यह कि दो लाख से अधिक जॉब कार्डधारकों में से 100 दिन का रोजगार सिर्फ 1,051 परिवारों को ही दिया जा सका है। 15 हजार 469 परियोजनाओं में से सिर्फ 883 कार्य ही पूर्ण हो पाई हैं। काम न मिलने पर एक भी मजदूर को प्रशासन भत्ता नहीं उपलब्ध करा सका है। और तो और दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों को भुगतान के लिए भी अक्सर दर-दर की ठोकरें खाने को विवश होना पड़ रहा है।
मनरेगा को जिले में प्रभावी बनाने के लिए पिछले कुछ समय में तेजी से प्रयास हुए हैं। इससे पूर्व के वर्षों की अपेक्षा खासा सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। दरअसल मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों की ही तूती बोलती है। ऐसे में वे समान रूप से सभी जॉब कार्डधारकों को काम देने की बजाए अपने खास लोगों पर ही ज्यादा मेहरबान रहते हैं। उसमें भी अक्सर यह शिकायत आती है कि काम तो जेसीबी या ठेके पर करा लिए जाते हैं और फिर बाद में खास जॉबकार्डधारकों के कार्ड पर अंकन कर खानापूर्ति कर ली जाती है। जिले के नौ विकास खंडों में कुल दो लाख 15 हजार 972 जॉबकार्डधारक हैं। इनमें से 79 हजार 396 परिवारों ने सरकारी रिकार्ड के मुताबिक काम मांगा है। प्रशासन ने अकबरपुर में 10,448, बसखारी में 5,361, भीटी में 6,835, भियांव में 7,428, जहांगीरगंज में 7,361, जलालपुर में 8,065, कटेहरी में 6,686, रामनगर में 7,264 व टांडा में 7,210 परिवार को रोजगार अब तक उपलब्ध करा दिया गया है। सरकारी रिकार्डों पर विश्वास करें, तो 66 हजार 658 परिवार रोजगार पा सके हैं, जबकि मौजूदा माह में लगभग 18 हजार परिवार ही काम कर पा रहे हैं।
योजना के तहत कार्यों को लेकर किस तरह लापरवाही का माहौल है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 883 कार्य ही पूर्ण किए जा सके हैं। मनरेगा के तहत इस वर्ष कुल 15 हजार 469 कार्य तय हुए थे। इनमें से 14 हजार 586 पर अभी कार्य चल रहा है। वित्तीय वर्ष के आठ माह बीत जाने के बाद भी अभी तक एक चौथाई कार्य भी पूरे नहीं हो सके हैं। उधर 100 दिन के रोजगार की स्थिति भी अत्यंत बदतर है। अकबरपुर में 191, बसखारी में 24, भीटी में 57, भियांव में 210, जहांगीरगंज में 31, जलालपुर में 224, कटेहरी में 99, रामनगर में 118 व टांडा में 97 जॉब कार्डधारक को ही 100 दिन का काम दिया जा सका है।