अंबेडकरनगर। गन्ना किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब तक जहां मिल शुरू न होने को लेकर किसान खासे परेशान थे, वहीं अब उन्हें पर्ची न मिलने व गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। ज्यादातर केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटे नदारद हैं। जिला प्रशासन से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई सामने न आने से किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
गौरतलब है कि लंबी जद्दोजहद के बाद मिल में गन्ना पेराई का कार्य शुरू हुआ है। इसके बाद भी गन्ना किसानों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। गन्ना किसान पर्ची प्राप्त करने से लेकर तौल व भुगतान में हो रही मनमानी से खासे परेशान दिख रहे हैं। किसान गन्ने की खेती को खासी मुसीबत की खेती समझने लगे हैं। कटरिया याक ूबपुर क्रय केंद्र से जुड़े बेलहारी के किसान तेजप्रकाश ने बताया कि मिल प्रबंधन ने गन्ने की खेती जितना मुफीद बताया था, वह अब उतनी नहीं रह गई है। गन्ने की बिक्री में खासी दिक्कत हो रही है। कहा कि मिल में पेराई देर से चालू होने के चलते बिक्री में काफी विलंब हुआ, जिससे गन्ने के खेतों में गेहूं की बोआई हो पाने की उम्मीद टूट चुकी की है। मिल चालू होने के बाद से पर्ची प्राप्त करने के लिए खासी मुसीबत हो रही है। कई बार चक्कर लगाने के बाद पर्ची मुहैया हो रही है। सूलपुर के किसान रामसागर, चांदपुर भटपुरा निवासी आशाराम व विजयगांव निवासी राजाराम क्रय केंद्रों पर घटतौली से आहत दिखते हैं। विलंब के चलते उन्हें कई प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
खानशाह सुलेमपुर गन्ना क्रय केंद्र से भी किसान संतुष्ट नहीं हैं। सलाहुद्दीनपुर गांव निवासी शिवमूर्ति व बरसावां निवासी नबी हसन को भी क्रय केंद्रों पर होने वाली तौल से एतराज हैं। कहा कि किसी तरह पर्ची मिलती है, तो उस पर भी 40 से 45 क्विंटल तक ही तौल हो पाती है। इसमें भी कांटों पर तैनात कर्मचारी तगड़ा चूना लगा रहे हैं। उनका मानना है कि प्रत्येक ट्रॉली में चार से पांच क्विंटल का नुकसान होता है। जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार गुवापाकड़ गन्ना क्रय केंद्र के क्षेत्र में आने वाले किसान चंदर, संजय, लालता प्रसाद व उमाकांत ने बताया कि यहां पर श्रमिकों की कमी है। इसके चलते तौल विलंब से हो रही है। बताया कि क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक कांटे आमतौर पर नदारद हैं।