अंबेडकरनगर। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा फॉर्म जमा करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी जिले के 24 विद्यालयों ने फॉर्म डीआईओएस कार्यालय में जमा नहीं किए। विद्यालय प्रबंधन की इस लापरवाही से लगभग नौ हजार छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। यदि बोर्ड द्वारा फॉर्म जमा करने की समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो इन विद्यालयों के छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईओएस ने इन विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विशेष बात यह है कि जिन विद्यालयों ने बोर्ड परीक्षा फॉर्म डीआईओएस कार्यालय को नहीं उपलब्ध कराए है, उनमें तीन विद्यालय राजकीय भी हैं।
शिक्षा माफिया पर अंकुश पाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कई सख्त कदम उठाए, लेकिन इन पर कोई विशेष प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है। शिक्षा माफिया की मनमानी व छात्र-छात्राओं के जीवन से खिलवाड़ लगातार जारी है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा फॉर्म बीते दिनों जिले के 274 विद्यालयों को डीआईओएस कार्यालय ने उपलब्ध करा दिए थे। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों से यह फॉर्म भरवाकर 6 सितंबर तक डीआईओएस कार्यालय में जमा करने थे। 25 सितंबर तक इन फॉर्मों का सत्यापन कर बोर्ड को भेज देना था। निर्धारित समय सीमा तक 250 विद्यालयों ने ही बोर्ड परीक्षा फॉर्म छात्र-छात्राओं से भरवाकर डीआईओएस कार्यालय में जमा किए, लेकिन 24 विद्यालयों क्रमश: राजकुमारी इंटर कॉलेज पीठापुर सरैया, अशोक बालिका विद्यामंदिर विष्णुनगर जीवधनपुर, यशोदानंद इंटर कॉलेज यरकी, प्रभा इंटर कॉलेज अहिरौली, दरगाही रामलहन पिलखावां, डॉ. स्मारक इंटर कॉलेज अकबरपुर व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज भीटी, जलालपुर तथा आलापुर आदि ने बोर्ड फॉर्म डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराए।
इस पर डीआईओएस ओमकारनाथ सिंह ने इन विद्यालयों को कई बार फॉर्म जमा करने का नोटिस भेजा, लेकिन इन विद्यालयों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। नतीजतन 25 सितंबर तक सत्यापन की तारीख भी समाप्त हो गई, लेकिन इन विद्यालयों ने फॉर्म उपलब्ध नहीं कराया। इससे लगभग नौ हजार छात्र-छात्राओं का बोर्ड परीक्षा में शामिल होने पर आशंकाओं के बादल छाने लगे हैं। यदि शासन स्तर से समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो इन विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का जीवन अंधकारमय हो सकता है।