अंबेडकरनगर। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक लोहिया समग्र गांव में विकास कार्यों को लेकर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी गंभीर नहीं हो पा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह कि वर्ष 2012-13 में चयनित 20 लोहिया समग्र गांवों में विकास कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सके हैं। और तो और गांवों में चल रहे विकास कार्यों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देने में भी लापरवाही बरती जा रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांवों में विकास कार्यों की देखरेख एवं जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिन 20 नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से ज्यादातर विकास कार्यों की रिपोर्ट देने में लापरवाह बने हुए हैं। स्थानांतरित सीडीओ ने कई बार विकास रिपोर्ट प्रत्येक माह प्रस्तुत किए जाने का भी निर्देश दिया, लेकिन अधिकारियों की मनमानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
सूबे में निजाम बदलने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक लोहिया समग्र गांव योजना चलाई गई। इसके तहत वर्ष 2012-13 में जिले के 20 गांवों का लोहिया समग्र गांव योजना के तहत चयन किया गया। इन गांवों में विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न हो, इसके लिए प्रत्येक गांव के लिए एक जिलास्तरीय अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि लोहिया समग्र गांवों के विकास कार्यों की जांच रिपोर्ट देने में लगातार आनाकानी बरती जा रही है। वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी इन गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। विगत दिनों तत्कालीन सीडीओ ने सभी नोडल अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रत्येक माह जांच रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, लेकिन इसका पालन करने की सुध इन अधिकारियों को नहीं रही। इसी कारण लोहिया समग्र गांव के चयन के बाद भी ग्रामीणों को शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।