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पहले दिन ही यूपी बोर्ड के 7981 छात्रों ने छोड़ी परीक्षा

Thu, 16 Mar 2017 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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परीक्षा - फोटो : symbolic
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नकल रोकने को लेकर बरती गई तमाम लापरवाही व मनमानी के बीच 174 केंद्रों पर गुरुवार को यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा प्रारंभ हुई। नकल विहीन परीक्षा कराने के तमाम दावे पहले ही दिन हवा-हवाई साबित हुए।
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शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक ने परीक्षा शुरू होने से पहले कार्य योजना को लेकर जिस तरह का लचर रवैया दिखाया, उससे ही पहले दिन तमाम केंद्रों पर मनमानी व अव्यवस्थाओं का बोलबाला दिखा। प्रथम पाली की हाईस्कूल परीक्षा में 42 हजार 716 और इंटरमीडिएट की द्वितीय पाली में 30 हजार 931 छात्रों ने परीक्षा दी।

हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के कुल सात हजार 981 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा से दूरी बनाए रखी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा को सकुशल व नकल विहीन कराने को लेकर इस बार जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग द्वारा बरती गई शिथिलता व अदूरदर्शिता का खामियाजा गुरुवार को पहले दिन परीक्षा शुरू होने पर दिखाई पड़ा।
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अकबरपुर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित 174 परीक्षा केंद्रों पर प्रथम पाली में हुई हिंदी की परीक्षा में ही आपाधापी का माहौल दिखा। कहीं प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं थी तो कहीं पेयजल के लिए छात्र-छात्राओं को परेशान होना पड़ा।

कहने को परीक्षा कक्ष में जाने से पहले मुख्य गेट पर ही स्टूडेंट्स की जांच की रस्म अदायगी ज्यादातर केंद्रों पर हुर्ई लेकिन पहले ही दिन कई केंद्रों पर जबरदस्त ढंग से नकल होने की खबर सामने आई। परीक्षा केंद्र बनाए गए दर्जनों निजी विद्यालयों में बोलकर प्रश्न पत्र हल कराए गए। कुछ केंद्र तो ऐसे भी थे जहां तमाम दिशा-निर्देश के बावजूद ब्लैक बोर्ड पर मिट्टी की पुताई नहीं की गई थी।

 विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रथम पाली में हाईस्कूल की हिंदी परीक्षा में पंजीकृत 48 हजार 077 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 42 हजार 716 छात्रों ने परीक्षा दी। पांच हजार 361 छात्र-छात्राएं इस दौरान अनुपस्थित रहे। द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट हिंदी प्रथम प्रश्नपत्र में पंजीकृत 33 हजार 551 स्टूडेंट्स के सापेक्ष 30 हजार 931 ने परीक्षा दी। दो हजार 620  छात्र-छात्राएं इसमें अनुपस्थित रहे।

इस तरह हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के कुल सात हजार 981 स्टूडेंट्स ने परीक्षा छोड़ दी। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए पांच सचल दस्तों का गठन तो किया गया लेकिन दस्तों ने महज औपचारिकता ही निभाई। पहले दिन एक भी नकलची नहीं पकड़ा जा सका।

नकल माफिया के मजबूत नेटवर्क का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सचल दस्ता के परीक्षा केंद्र पर पहुंचने से पहले ही इसकी जानकारी नकल माफिया को हो जा रही थी। नतीजतन जब सचल दस्ता संबंधित परीक्षा केंद्रों पर पहुंचता तो वहां आल इज ओके मिलता

। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोंडा में नकल को लेकर तीखे सवाल खड़े किए जाने के बावजूद यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह नजर आया। प्रधानमंत्री के बयान के बाद इस जिले में भी नकल रोकने को लेकर सख्त इंतेजाम किए जाने की उम्मीद थी लेकिन यहां तो गत वर्ष जितनी व्यवस्था में ही भारी कटौती कर दी गई।

गत वर्ष प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर दो-दो स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। इससे नकल पर कुछ हद तक अंकुश लगाने में प्रशासन कामयाब भी हुआ था। इस बार मात्र संवेदनशील व अतिसंवेदनशील समेत कुल 12 परीक्षा केंद्रों पर ही स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र कहते हैं कि स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती में बड़े पैमाने पर की गई कटौती के चलते केंद्र व्यवस्थापकों के बीच अच्छा संदेश नहीं गया। नकल रोकने के लिए गत वर्ष की व्यवस्था में बढ़ोतरी न की गई होती तो भी चल जाता लेकिन उसमें कटौती करना कतई उचित नहीं था। अभी भी समय है। प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। 
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