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Ambedkar Nagar News: 690 किलो मिलावटी छेना पकडा, मिठाइयों में मिले कीड़े-मकोड़े

Wed, 15 Oct 2025 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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अलीगंज के कासोपुर रुस्तमपुर गांव छेना बनाने वाली फैक्ट्री में जांच करते खाद्य विभाग के अ​धिकारी
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अंबेडकरनगर। त्योहारी सीजन से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए टांडा के कासोपुर रुस्तमपुर में अवैध मिठाई कारखाने का भंडाफोड़ किया है। यहां गंदगी और कीड़ों के बीच छेना व मिठाई तैयार की जा रही थी, जिसे बाजार में खपाने की तैयारी थी। टीम ने मौके पर करीब 1.03 लाख मूल्य का 690 किग्रा छेना नष्ट कराया और मिठाई बनाने में इस्तेमाल की जा रही अधोमानक सामग्री व उपकरण भी जब्त किए। संचालक गोविंद के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उसने पूछताछ में एक माह से कारोबार शुरू करने की बात कबूली, जबकि स्थानीय लोग इसे लंबे समय से चलती फैक्ट्री बता रहे हैं।
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मंगलवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित पांडेय की नेृतत्व में टीम ने कासोपुर रुस्तमपुर गांव में मिठाई बनाने वाले कारखाने पर जांच की तो यहां नजारा देखकर दंग रह गए। गंदगी के बीच बड़े पैमाने पर छेना तैयार किया गया था। संचालक गोविंद इनकी सप्लाई अलीगंज, टांडा व अन्य आसपास के छोटे दुकानदारों को कम कीमत पर करता था। इस कार्रवाई की खबर लगने के बाद अलीगंज व टांडा क्षेत्र में कई मिठाई विक्रेता अपनी दुकानों पर ताला लगाकर चले गए थे। विभाग अगर समय रहते इस कारखाने का खुलासा नहीं करता तो इन छेनों के सेवन से लोगों का स्वास्थ्य खराब होना तय था। सहायक आयुक्त श्रवण कुमार त्रिपाठी ने बताया खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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ऐसे तैयार होता था छेना
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार संचालक गोविंद मिठाई तैयार करने में मिल्क पाउडर, मिलावटी दूध का इस्तेमाल करता था। बर्तन भी अत्यंत गंदे इस्तेमाल किए जा रहे थे। जो चासनी तैयार की जाती है, वह भी गंदगी से युक्त थी। इसके अलावा रिफाइंड भी घटिया क्वॉलिटी का इस्तेमाल किया जाता था।
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फूड पॉइजनिंग का रहता खतरा
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. विवेक पांडेय ने बताया कि बासी, सड़ी-गली या दूषित सामग्री से बनी मिठाइयों में बैक्टीरिया और फफूंदी पनप सकती है। फूड पॉइजनिंग हो सकती है, जिसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं। मिठाइयों में सिंथेटिक रंग, सस्ते केमिकल युक्त सजावट या चांदी के नकली वर्क का उपयोग होता है।
ये रसायन लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी व लिवर फेलियर तक का खतरा बढ़ा सकते हैं।
नकली रंगों और मिलावटी तत्वों से स्किन एलर्जी हो सकती है। कुछ लोगों को सांस की दिक्कतें भी हो सकती हैं।
कुछ मिठाइयों में ऐसे कैमिकल्स मिलाए जाते हैं जो शरीर के हॉर्मोन बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर बच्चों में।


बचाव के उपाय

बाजार से मिठाई लेते समय विश्वसनीय दुकानों को ही प्राथमिकता दें।
खुली मिठाइयों की जगह पैक्ड व लेबल वाली मिठाई खरीदें।
चांदी के वर्क वाली मिठाई से बचें, जब तक उसकी गुणवत्ता प्रमाणित न हो।
खरीदारी की रसीद जरूर लें, ताकि शिकायत करने पर सबूत हो।
घर की बनी मिठाई ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थ्यप्रद होती है।
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अब तक लिए गए 354 नमूने, 118 हुए फेल
अंबेडकरनगर। खाद्य विभाग की ओर से इस वित्तीय वर्ष में सितंबर तक विभिन्न खाद्य पदार्थोंं 354 नमूने लिए गए हैं, जिसमें अब तक 118 के नमूने फेल हो गए हैं। शेष की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


एक क्विंटल लड्डू व कलाकंद भी कराया नष्ट
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र वर्मा के नेतृत्व में टीम ने जलालपुर क्षेत्र के निमटिनी में दिनेश कुमार की दुकान से बेसन लड्डू व कलाकंद का नमूना लिया गया। यहां भंडारित करीब 50 किग्रा बेसन लड्डू और 50 किग्रा कलाकंद नष्ट कराया। इनकी कीमत करीब 17500 रुपये थी। वहीं, आलापुर के मसेना मिर्जापुर चहोड़ा से सरसों तेल का नमूना लिया है।
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