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समायोजन के इंतजार में 543 शिक्षामित्र

Wed, 03 Feb 2016 11:06 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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एक तो उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित न हो पाने का मलाल है, उस पर से मानदेय भुगतान समय पर न होने की दोहरी मार भी झेलनी पड़ रही है।
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प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किए जाने की घोषणा की तो लंबे समय से सहायक अध्यापक पद पर समायोजित होने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जिले के लगभग दो हजार शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।

लंबी प्रक्रिया के बाद समायोजन का कार्य प्रारंभ हुआ। दो बैच में 1 हजार 601 शिक्षामित्रों का ही समायोजन हो पाया था कि न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। नतीजतन 543 शिक्षामित्र समायोजित होने से वंचित रह गए।
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इसमें 415 ऐसे शिक्षामित्र भी थे जिन्हें पूर्व में समायोजन की प्रक्रिया के दौरान सीट भर जाने की वजह से मौका नहीं मिल पाया, जबकि 138 ऐसे शिक्षामित्र थे, जिनका प्रशिक्षण पूरा नहीं हो पाया था। बीते दिनों जब न्यायालय ने रोक को वापस ली तो एक बार फिर से शेष बचे रह शिक्षामित्रों में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती की उम्मीद बढ़ गई।

इसके बाद भी जब शासन से शेष रह गए शिक्षामित्रों के समायोजन को लेकर किसी प्रकार की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकी तो शिक्षामित्रों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बीच वंचित शिक्षामित्रों ने प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया है। ऐसे में अब उन्हें समायोजित होने का इंतजार है।

समायोजन न होने की मार झेल रहे शिक्षामित्रों की मुश्किलें यहीं तक सीमित नहीं। उन्हें मानदेय के लिए भी जूझना पड़ रहा है। शिक्षामित्र संगठन जिलाध्यक्ष केके दुबे ने बताया कि शिक्षामित्रों को कई माह से मानदेय ही नहीं मिल पा रहा था।
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लंबे दबाव के बाद बेसिक शिक्षा से जुड़े 9 शिक्षामित्रों को दिसंबर तक का तथा अन्य शिक्षामित्रों को सितंबर तक का मानदेय भुगतान गत दिवस हुआ है। इसमें भी विभागीय मनमानी के कारण शिक्षामित्रों को जनवरी तक का भुगतान नहीं हो पाया। इससे शिक्षामित्रों के समक्ष खासी मुश्किलें व्याप्त हैं।
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