अंबेडकरनगर। शिक्षा सत्र बीतने को है, लेकिन जिले के 52 हजार छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का इंतजार बना हुआ है। इसमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। छात्रवृत्ति पाने के लिए अक्सर संबंधित छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक विद्यालय प्रशासन से लेकर जिला मुख्यालय पर अलग अलग कार्यालयों का चक्कर लगाने को विवश हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिल पाई है। वंचित छात्र-छात्राओं ने निराशा जताते हुए कहा कि शिक्षा सत्र बीतने के करीब है, लेकिन इसके बावजूद अब तक छात्रवृत्ति का लाभ न मिल पाना चिंताजनक है।
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए सरकार की तरफ से प्रत्येक वर्ष छात्रवृत्ति का प्रबंध किया जाता है। यह बात अलग है कि अलग अलग दौर में शासन की तरफ से अलग अलग बजट सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक तथा अनुसूचित वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आवंटित किया जाता रहा है। शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं को इसका लाभ न मिलने व बजट आवंटन में भेदभाव की शिकायतें पहले से ही चली आ रही हैं। मौजूदा शिक्षासत्र भी इससे अछूता नहीं है। इस सत्र में भी शुल्क प्रतिपूर्ति से लेकर छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है। अभिभावक नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि एक तरफ सरकार शैक्षिक संस्थानों की बेहतरी तय करने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ छात्रवृत्ति का लाभ सभी छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराने की फिक्र नहीं है।
हालात यह हैं कि हाईस्कूल में अनुसूचित वर्ग के 16 हजार 567 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन 15 हजार 10 छात्र-छात्राओं के लिए ही 423.35 लाख रुपये निर्गत किए जा सके। सामान्य वर्ग के 4029 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष 1987 छात्र-छात्राओं को 57 लाख 89 हजार का लाभ मिल सका। इंटरमीडिएट में अनुसूचित वर्ग के 42 हजार 88 के सापेक्ष सिर्फ 35 हजार 813 छात्र-छात्राओं को 2875 लाख रुपये का लाभ दिया गया। सामान्य वर्ग के 18 हजार 219 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष सिर्फ 11 हजार 815 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए। इनके लिए जिले में 977 लाख 79 हजार रुपये निर्गत हुआ।
हाईस्कूल पिछड़ा वर्ग के कुल 75 हजार 143 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था, लेकिन उनमें से 49 हजार 902 छात्र-छात्राओं को ही 1556 लाख की छात्रवृत्ति मिल सकी। इसी तरह इंटरमीडिएट में 26 हजार 60 छात्र-छात्राओं के आवेदन के सापेक्ष 19 हजार 443 छात्र-छात्राओं को 412 लाख की छात्रवृत्ति मिल पाई। अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। उन्हें भी आवेदन के सापेक्ष छात्रवृत्ति का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। ऐसे में लगभग 52 हजार छात्र-छात्राएं ऐसे हैं, जिन्हें शिक्षासत्र बीतने के अंत तक छात्रवृत्ति का इंतजार बना रहा।
पढ़ाई के साथ साथ हजारों छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के लिए आए दिन विद्यालय प्रशासन से लेकर जिला मुख्यालय स्थित कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय स्थित समाज कल्याण कार्यालय में मिले अभिभावक ओमप्रकाश ने बताया कि उनकी बेटी रीना कटेहरी के एक विद्यालय में इंटरमीडिएट में अध्यनरत है। उसे अभी तक छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पाया है। अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में बेटी नगमा के साथ पहुंची उनकी मां रेशमा ने बताया कि बिटिया हाईस्कूल में नगर के एक स्कूल में पढ़ रही है।
विद्यालय में छात्रवृत्ति के बारे में पूछा जाता, तो वहां ऊपर से ही पैसा न आने की जानकारी दी जाती है। यहां कार्यालय तक दौड़ कर आने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जाता। नतीजा यह है कि अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलालपुर की छात्रा पूनम, हंसवर की रिया, टांडा के छात्र पंकज वर्मा तथा आलापुर के अभिषेक यादव कहते हैं कि छात्रवृत्ति मामले में इस तरह का भेदभाव अनुचित है। शिक्षा के मामले में सरकारों को बगैर कोई कटौती किए सभी को जरूरी लाभ सुनिश्चित कराना चाहिए।
छात्रवृत्ति हो या शुल्क प्रतिपूर्ति सभी मामलों में शासन की तरफ से तत्परता बरती जा रही है। बजट के हिसाब से लाभ दिलाया भी जा रहा है। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा।
पंकज वर्मा, एडीएम