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डाकघरों में खुले 500 नए खाते, 30 करोड़ जमा

Sat, 26 Nov 2016 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर का प्रधान डाकघर। - फोटो : अमर उजाला
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बड़े नोट बैन किए जाने के बाद मुख्य डाकघर में नकदी जमा करने का भले ही टोटा रहा हो लेकिन लगभग सवा तीन सौ ग्रामीण उप डाकघरों में बल्ले-बल्ले रही। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के सभी डाकघरों को मिलाकर लगभग 30 करोड़ रुपये की रकम जमा हुई। लगभग 500 नए खाते भी इस दौरान खोले गए जबकि लगभग 800 निष्क्रिय पड़ चुके खातों को सक्रिय कर उसमें धन जमा किया गया।
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इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि नोट बंदी से पहले सन्नाटे में डूबे रहने वाले डाकघरों में किस तरह रौनक बिखर गई। आमतौर पर इतनी बड़ी रकम पूरे वर्ष जमा नहीं हो पाती जितनी रकम एक पखवारे में विभिन्न खातों में जमा हो गई। गौरतलब है कि 8 नवंबर को केंद्र सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था।

इसके बाद बैंकों में पुराने पांच सौ व एक हजार के नोट बदलने के अलावा खातों में इन नोटों को जमा करने की होड़ सी लग गई। 3 अरब से भी ज्यादा रुपये विभिन्न बैंकों के खातों में कुछ दिनों के भीतर ही लोगों ने फटाफट जमा कर डाले। इन सब के बीच डाकघरों में भी आमतौर पर छायी रहने वाली वीरानगी दूर होती नजर आयी।
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500 व एक हजार के नोट को खपाने के लिए लोगों ने डाकघरों का भी बढ़-चढ़कर रुख किया। जिले में एक प्रधान डाकघर के अलावा 31 उप डाकघर तथा 290 ब्रांच डाकघर स्थापित हैं। इन सभी 321 शाखाओं में नोटबंदी के बाद लोग पैसे जमा करने के लिए तो उमड़े लेकिन इसमें शहरी क्षेत्र के डाकघरों से कन्नी काटे रखना खासा चौंकाने वाला रहा। शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ब्रांच डाकघरों में ज्यादा रकम जमा हुई।

ऐसा इसलिए माना जा रहा क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में खुले इन डाकघरों की तरफ आमतौर पर लोगों का ध्यान नहीं रहता। इसका ही खूब फायदा उठाया गया। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की सभी शाखाओं को मिलाकर लगभग 30 करोड़ रुपये नोटबंदी के बाद से अब तक जमा कराए जा चुके हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग 800 ऐसे खातों को सक्रिय किया गया जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े थे।

आवश्यक प्रक्रिया अपनाने के बाद इन खातों में भी रकम जमा करने की मंजूरी डाकघरों ने दी। हालांकि खाता खुलने का दौर इस दौरान ज्यादा तेज नहीं रहा। कारण यह कि शुरुआती लगभग 10 दिन तक तो डाकघरों में नोट बदलने व जमा करने का ही काम चलता रहा। कर्मचारी इसी में इतने व्यस्त रहे कि उन्हें नए खाते खोलने की आमतौर पर फुर्सत ही नहीं मिली।

हालांकि 19 नवंबर के बाद से खाता खोलने की तरफ ध्यान दिया गया। अब तक लगभग 500 नए बचत खाते खोले जा चुके हैं। नए खाते खोलने के लिए ग्रामीण डाक कर्मचारियों ने पिछले पांच दिन से विशेष अभियान भी शुरू किया है। डाक प्रशासन के अनुसार आने वाले एक सप्ताह के भीतर लगभग तीन हजार नए खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

अकबरपुर प्रधान डाकघर में सात लाख 60 हजार रुपये के पुराने बड़े नोट बदले गए। इसमें 500 के 952 तथा एक हजार के 284 नोट शामिल हैं। पुराने नोटों को बदलने का जोर दरअसल डाकघरों के बजाय बैंकों की तरफ ज्यादा था। ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती दौर में डाकघरों के पास आवश्यक करेंसी का ही अभाव था।

बाद में धन उपलब्धता होने पर नोटबंदी के कई दिनों बाद डाकघरों में नोट बदलने का कार्य गति पकड़ पाया। अकबरपुर के पोस्टमास्टर सीके तिवारी ने बताया कि नोटबंदी के बाद से सभी डाकघरों में लगभग 30 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्र की शाखाओं में ज्यादा रकम जमा हुई है। कोई भी ऐसा खाता नहीं था, जिसमें ज्यादा मात्रा में रकम जमा हुई हो।

लगभग 800 निष्क्रिय खाते जरूर आवश्यक औपचारिकता पूरी करने के बाद शुरू किए गए और उसमें रकम भी जमा हुई। लगभग 500 नए खाते इस अवधि में खुले हैं लेकिन अब अभियान चलाकर नए खाते खोलने पर जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ढाई-तीन हजार नए खाते खुल जाएंगे। 
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