इनमें से 19 करोड़ 82 लाख 78 हजार रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन एमआईएस फीडिंग के बाद भी लगभग 20 हजार मजदूरों का 5 करोड़ 59 लाख 79 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं हो सका।
मजदूरी भुगतान के लिए संबंधित मजदूर ग्राम प्रधान से लेकर संबंधित अधिकारियों तक के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
नतीजा यह है कि संबंधित मजदूरों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है। यदि शीघ्र ही उन्हें मजदूरी भुगतान नहीं हुआ, तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने के बाद भुगतान लंबे समय तक के लिए भी लटक सकता है।
अपने ही गांव में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा योजना का समुचित लाभ जिले के 2 लाख 19 हजार 68 जाबकार्डधारकों को नहीं मिल पा रहा है। न तो उन्हें सुचारु तरीके से 100 दिन का रोजगार मिल पा रहा है और न ही किए गए कार्यों का समय पर भुगतान हो रहा है।
इसके चलते जाबकार्डधारक मायूस है। योजना के तहतचालू वित्तीय वर्ष में जिले को लेबर बजट के रूप में 51 करोड़ 59 लाख 77 हजार रुपये धनराशि की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें से अगस्त माह तक मात्र 24 करोड़ 13 लाख 70 हजार रुपये खर्च किए जाने का लक्ष्य दिया गया था।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह के अंत तक लक्ष्य से अधिक 25 करोड़ 42 लाख 57 हजार रुपये का कार्य कराया गया। इनमें से 19 करोड़ 82 लाख 78 हजार रुपये का मजदूरी भुगतान कर दिया, जबकि एमआईएस फीडिंग के बाद भी 5 करोड़ 59 लाख 79 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं हो सका है।
नतीजा यह है कि लगभग 20 हजार मनरेगा मजदूर मजदूरी भुगतान को लेकर इधर उधर भटकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। दरअसल मजदूरी भुगतान के लिए शेष बची धनराशि केंद्र सरकार से ही अब तक राज्य सरकार को नहीं उपलब्ध हो सकी है।
संबंधित मजदूरों को यह चिंता सताए जा रही है कि यदि शीघ्र ही उन्हें मजदूरी भुगतान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में त्रिस्तीय पंचायत की आचार संहिता लागू हो गई, तो उनका भुगतान लंबे समय तक के लिए लटक जाएगा।