अंबेडकरनगर। माह के पहले और तीसरे शनिवार को तहसील दिवस में समाधान को आयोजन किया जाता है। जहां पर सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं। ऐसे में फरियादियों भी उनकी समस्या का समाधान होने की उम्मीद रहती है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण समाधान दिवस में पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। न्याय पाने के लिए फरियादी वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, उनकी एड़ियां घिस गई, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। समाधान दिवस में सबसे अधिक मामले पुलिस और राजस्व से जुड़ी आ रही हैं। इससे यह स्पष्ट है कि इन विभागों की कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से सरकार की ओर से समाधान दिवस में त्वरित न्याय देने की मंशा सफल नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि लोगों को अधिकारी केवल आश्वासन ही मिल पा रहा है। शनिवार को आयोजित समाधान दिवस में 433 मामलों में केवल 31 मामलों का ही निस्तारण हो सका। आलापुर तहसील में सीडीओ आनंद शुक्ला की अध्यक्षता में समाधान दिवस आयोजित हुआ। जहां पर 175 शिकायतें आई जिसमें से 15 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका। इसी तरह से जलालपुर में एसडीएम मौजूद रहे। जहां पर 116 शिकायती पत्र आए थे। जिनमें 10 शिकायती पत्र का निस्तारण हो सका। भीटी में 59 शिकायतों में छह शिकायती पत्रों का निस्तारित किया गया। अकबरपुर में एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता तथा एसडीएम शशिशेखर के समक्ष 56 शिकायती पत्र आए। टांडा में एसडीएम अरविंद त्रिपाठी की मौजूदगी में 37 शिकायती पत्र आए।
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केस एक
छह बार की शिकायत समाधान अब तक नहीं
जलालपुर तहसील में शिकायत लेकर आए बंदीपुर गांव के रहने रामबाबू ने बताया कि गांव में विपक्षियों की ओर से चकमार्ग पर अवैध कब्जा किया गया है। इसको लेकर उसने अब तक छह बार शिकायतें की है, लेकिन हर बार जांच कर कार्रवाई का आश्वासन मिल जाता है।
केस दो
वल्दियत बदलवाने में गुजर रहे साल
भीटी तहसील में शिकायत लेकर आए मंझनपुर गांव के बृजराज दुबे ने बताया कि तीन साल पहले हुए एक बैनामे में वल्दियत गलत हो गई थी। जिसको सही कराने के लिए वह लगातार तीन वर्षों से तहसील प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक कोई हल नहीं हो सका।