पावर कार्पोरेशन की मनमानी से एक बार फिर साउथ-वेस्ट फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं को करीब 24 घंटे तक बिना विद्युत आपूर्ति के रहना पड़ा। बुधवार पूरे दिन व रात आपूर्ति नहीं मिल सकी, करीब 40 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हुई। इससे उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
उपभोक्ताओं ने इस दौरान कई बार शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन पावर कार्पोरेशन के कर्मचारी टाल-मटोल ही करते रहे। कार्पोरेशन की इस लापरवाही से लोगों में नाराजगी का माहौल दिखा। गुरुवार पूर्वाह्न करीब 24 घंटे बाद आपूर्ति बहाल हुई तो उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली।
मंगलवार को आयी आंधी-पानी से साउथ-बेस्ट फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति करीब 24 घंटे तक बाधित रही। इससे लोगों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घरों में लगे इनवर्टर आदि भी जवाब दे गए। बुधवार पूरे दिन उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिली।
उम्मीद थी कि रात में आपूर्ति बहाल होगी लेकिन लोग बिजली आने का इंतजार करते रह गए। पूरी रात बिजली नहीं आयी। इससे आक्रोशित उपभोक्ताओं ने रात में कई बार विद्युत कर्मियों से आपूर्ति न आने का कारण पूछा लेकिन पावर कार्पोरेशन के अधिकारी या तो फोन नहीं उठाए और यदि उठाया भी तो टाल-मटोल करते रहते।
पावर कार्पोरेशन की इस लापरवाही से उपभोक्ताओं में खासी नाराजगी का माहौल दिखा। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कार्पोरेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से अक्सर ऐसी समस्या सामने आती रहती है। पावर कार्पोरेशन की इसी लापरवाही का खामियाजा बुधवार पूरे दिन व रात उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा।
साउथ-वेस्ट फीडर से जुड़े परमदा, अरजानीपुर, शुकलहिया, अरियौना, बनगांव डिहवा, सतरही, झलरिया, मरथुआ, सरैया, पंडित पूरा, हैदरजोत, बट्टूगढ़, आनंदनगर, बरवां, टीकमपारा, शाहपुर परासी, बेलाबाग व रतनपुर आदि गांवों के लोगों को 24 घंटे तक आपूर्ति से वंचित रहना पड़ा।
उपभोक्ता ओमप्रकाश तिवारी व नरेंद्र सिंह का कहना है कि कार्पोरेशन के अधिकारियों की मनमानी का खामियाजा अक्सर उन पर भारी पड़ता रहता है। कार्पोरेशन उपभोक्ताओं के हितों को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा है। जिला प्रशासन को इस लापरवाही को लेकर सख्त कदम उठाना होगा।