अंबेडकरनगर। स्टाफ की कमी से संघर्ष कर रहे 40 सीएचसी व पीएचसी को खुद ही इलाज की दरकार है। चिकित्सक के 156 पद में 70 तो फार्मासिस्ट के 17 पद पर खाली हैं। योजनाओं का बेहतर लाभ दिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाली एएनएम के सृजित 318 पद को भी नहीं भरा जा सका है। इनके भी 86 पद रिक्त हैं। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन, एक्स रे टेक्नीशियन के भी सभी पद पर तैनाती नहीं हो सकी है।
मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए स्थापित किए गए सीएचसी व पीएचसी स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। इसके चलते बेहतर इलाज व जांच के लिए संबंधित सीएचसी व पीएचसी में पहुंचने वाले मरीजों को तगड़ा झटका लग रहा है। सीएचसी व पीएचसी से मायूसी मिलने पर मरीजों को जिला अस्पताल तक की लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है।
सीएमओ कार्यालय के अनुसार 29 पीएचसी व 11 सीएचसी पर चिकित्सकों के कुल 156 पद सृजित हैं जिसमें 86 पर ही तैनाती है। फार्मासिस्ट के 82 पद में 65 पर तैनाती है। 17 पद पर तैनाती नहीं हो सकी है। लैब टेक्नीशियन के 26 पद में 18 पर तैनाती है जबकि आठ पर अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। एक्स रे टेक्नीशियन के 12 पद में नौ पर तैनाती है। तीन रिक्त चल रहे हैं। डार्क रूम सहायक के 12 में मात्र छह पर ही तैनाती है। एएनएम के 318 पद में 232 पर तो तैनाती है लेकिन 86 पद रिक्त हैं। स्टाफ नर्स के 67 पद सृजित हैं। 55 पर तैनाती है जबकि 12 रिक्त चल रहे हैं।
मरीजों को हो रही मुश्किल
सीएचसी व पीएचसी पर चिकित्सकों व अन्य कर्मियों की कमी से मरीजों को दूर दराज के क्षेत्रों से जिला अस्पताल तक का सफर तय करना पड़ता है। इसमें उनके समय की बर्बादी के साथ ही आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। जहांगीरगंज के रामलखन कहते हैं कि यदि सीएचसी व पीएचसी में विशेषज्ञ स्टाफ रहे तो कोई भी मरीज या तीमारदार जिला मुख्यालय तक की दौड़ क्यों लगाएगा। जलालपुर के आलोक वर्मा कहते हैं कि चिकित्सा विभाग को विशेष मुहिम चलाकर सभी रिक्त पदों पर तैनाती करनी चाहिए। इससे मरीजों को ज्यादा लाभ दिलाया जा सकेगा।
किए जा रहे प्रयास
रिक्त चल रहे पद पर तैनाती के लिए विभाग को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। उपलब्ध संसाधन में ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जा रही है। जल्द ही स्टाफ की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। - डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ