चीनी मिले शासन द्वारा दर निर्धारण न होने का हवाला देकर भुगतान रोके हुए हैं। अगर पुरानी दर पर ही इसका भुदना किया जाए तो यह राशि लगभग 30 करोड़ रुपये है। उधर गन्ना बिक्री में पर्ची के लिए भी किसानों का मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
चीनी मिल प्रशासन 60 हजार से अधिक किसानों को एक एक पर्ची उपलब्ध कराने का दावा तो कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अभी तक 40 हजार किसानों को ही पर्ची मिल सकी है।
गन्ना किसानों के समक्ष मौजूदा समय में बिक्री एवं भुगतान को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ उन्हें पर्ची के लिए इधर-उधर की दौड़ लगानी पड़ रही है तो दूसरी तरफ भुगतान न होने से भी उनमें संशय का माहौल है। अब तक शासन से गन्ने का समर्थन मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सका है।
ऐसे में अकबरपुर चीनी मिल मिझौड़ा द्वारा किसानों का गन्ना खरीदा तो जा रहा है, लेकिन उनका भुगतान नहीं किया जा रहा है। किसानों को यह कहकर उनका गन्ना खरीदा जा रहा है कि मूल्य के निर्धारण के बाद उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। किसान अपना गन्ना केंद्रों पर बेच तो रहे हैं, लेकिन समय पर भुगतान हो सकेगा, इसे लेकर उनमें आशंका है।
गत वर्ष शासन से रेट निर्धारण न होने के बाद भी गन्ना खरीद के एक सप्ताह बाद से 240 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान होने लगा था। इस बार भी किसान यही आस लगाए थे, पर उन्हें करारा झटका लगा है।
जिले में लगभग 65 हजार गन्ना किसान हैं। उन्हें गन्ना बिक्री करने में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए मिल गेट सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 33 केंद्र की स्थापना की गई है। शासन से चीनी मिल को 70 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य दिया गया है।
मुख्य गन्ना प्रबंधक अरविंद सिंह ने बताया कि 60 हजार से अधिक किसानों को एक एक पर्ची दे दी गई है। पर्ची में किसी प्रकार की बाधा नहीं उत्पन्न हो रही है। बताया कि समर्थन मूल्य का निर्धारण न होने के चलते किसानों का गन्ना खरीदा तो जा रहा है, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है।
मिल के पास धनराशि की कमीं नहीं है। समर्थन मूल्य निर्धारित होने के साथ ही किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा। बताया कि अब तक 60 हजार से अधिक किसानों का 12 लाख 50 हजार क्विंटल गन्ना खरीदा जा चुका है। उधर चीनी मिल के इस दावे के सापेक्ष पुराने दर 240 के ही हिसाब से अब तक हुई खरीद का कुल 30 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जाना है, जबकि गन्ने की खरीद शुरू हुए लगभग तीन सप्ताह बीत चुके हैं।