साइलेंट नकल व अव्यवस्थाओं के बीच चल रही यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में शनिवार को कुल 2 हजार 781 छात्रों ने परीक्षा से किनारा किया। प्रथम पाली में जहां हाईस्कूल वाणिज्य व अर्थशास्त्र की परीक्षा में 161 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे, वहीं द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट हिंदी द्वितीय प्रश्नपत्र में 2 हजार 620 परीक्षार्थियों ने परीक्षा से किनारा किया।
इस बीच तीसरे दिन भी ज्यादातर परीक्षा केंद्रों पर साइलेंट नकल का बोलबाला रहा। नकल पर अंकुश लगाने के लिए गठित सचल दस्तों ने जांच के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई। नकल माफिया के मजबूत नेटवर्क के आगे प्रशासन पूरी तरह लाचार दिखा। गौरतलब है कि 16 मार्च से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा अव्यवस्थाओं के बीच प्रारंभ हुई थी।
पहले दिन ही प्रशासन के नकल विहीन परीक्षा कराने के सभी दावे हवा-हवाई साबित हुए। जिले के 174 परीक्षा केंद्रों के सापेक्ष ज्यादातर केंद्रों पर साइलेंट नकल का बोलबाला रहा। नकल रोकने को गठित पांच सचल दस्ते परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे जरूर लेकिन जांच के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई गई। नतीजतन केंद्रों पर साइलेंट नकल का दौर लगातार जारी है।
शनिवार को भी परीक्षा केंद्रों पर धड़ल्ले से साइलेंट नकल हुई। नकल माफिया के मजबूत नेटवर्क के आगे प्रशासन पूरी तरह असहाय दिखा। मजबूत नेटवर्क का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता केंद्र पर सचल दस्ते के पहुंचने से पहले ही उनके पहुंचने की जानकारी केंद्र तक पहुंच जा रही थी।
इस बीच प्रथम पाली में हाईस्कूल की वाणिज्य विषय की परीक्षा में पंजीकृत 81 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 79 छात्रों ने परीक्षा दी जबकि अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा में 1955 के सापेक्ष 1796 छात्रों ने परीक्षा दी। इस प्रकार प्रथम पाली में कुल 161 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट हिंदी द्वितीय प्रश्नपत्र में पंजीकृत 33 हजार 551 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 30 हजार 931 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। 2 हजार 620 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। इस प्रकार दोनों पालियों में कुल 2 हजार 781 परीक्षार्थियों ने परीक्षा से किनारा किए रखा। यूपी बोर्ड परीक्षा में स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात करने में प्रशासन की एक और अदूरदर्शिता व लापरवाही सामने आई है।
गत वर्ष तत्कालीन जिला प्रशासन ने जहां सभी सामान्य व संवेदनशील केंद्रों पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए थे, वहीं इस बार प्रशासन ने भारी कटौती करते हुए सिर्फ 12 संवेदनशील केंद्रों पर ही स्टेटिक मजिस्टे्रट तैनात किए हैं।
इसमें भी अदूरदर्शिता यह कि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की तरफ से स्टेटिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति के आदेश में किसी रोटेशन का जिक्र नहीं है जबकि गत वर्ष प्रतिदिन स्टेटिक मजिस्ट्रेट बदल दिए जाते थे। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि स्टेटिक मजिस्ट्रेटों तथा केंद्र व्यवस्थापकों आदि के बीच कोई मतभेद न होने पाए। गत वर्ष की इस व्यवस्था से इस बार जिला प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
स्टेटिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती सिर्फ 12 केंद्रों पर की गई तो भी उन्हें अलग-अलग परीक्षा के दिन बदलते रहने की सुध जिला प्रशासन को नहीं हुई। कई सेवानिवृत्त शिक्षकों ने इसे लेकर सवालिया निशान भी खड़े किए हैं।
उनका कहना था कि नकल रोकने के लिए व्यवस्था में की गई कटौती से निश्चित तौर पर नकल माफिया के हौसले बुलंद हुए। प्रशासन को ऐसी परिस्थिति से बचना चाहिए था। डीआईओएस विनोद सिंह ने बताया कियूपी बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन संपन्न कराने के लिए केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्था की गई है। प्रशासन पूरी तरह नकल रोकने को लेकर सक्रिय है। कहीं से किसी गड़बड़ी की कोई खबर नहीं है।