अंबेडकरनगर। बाल विकास पुष्टाहार विभाग के जनवरी में चलाए गए विशेष स्वास्थ्य परीक्षण अभियान में कुपोषित बच्चों की संख्या 2583 बढ़ गई। राहत यह है कि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में 551 की कमी आई है। फिलहाल कुपोषित बच्चों की बढ़ी संख्या ने विभाग को परेशान कर दिया है।
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बाल विकास पुष्टाहार विभाग कई तरह की योजनाएं चला रहा है। प्रतिमाह बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है। मौजूदा समय में आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से छह वर्ष तक के 2,22,608 बच्चे पंजीकृत हैं।
दिसंबर में इन बच्चों में से 2,15,815 बच्चों की लंबाई, वजन व अन्य स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 1,80,743 बच्चों का स्वास्थ्य सामान्य श्रेणी का मिला जबकि 31,316 बच्चे कुपोषित व 3,756 बच्चे अतिकुपोषित मिले।
जनवरी में विभाग की टीम ने 2,18,425 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें 1,81,321 बच्चों का स्वास्थ्य सामान्य मिला। इस बार गत माह की तुलना में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 33,899 हो गई। हालांकि इस बार अतिकुपोषित बच्चों की संख्या घटकर 3,205 पर पहुंच गई है।
आंगनबाड़ी केंद्रों से प्रतिमाह छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों बच्चों को एक किलोग्राम दलिया, एक किलोग्राम चावल, एक किलोग्राम चने की दाल व 500 ग्राम खाद्य तेल दिया जाता है। तीन वर्ष से छह वर्ष तक के बच्चों को 500 ग्राम गेहूं का दलिया, 500 ग्राम चावल व 500 ग्राम चने की दाल दी जाती है।
जांच में अतिकुपोषित मिलने वाले बच्चों को 1.5 किलोग्राम दलिया, 1.5 किलोग्राम चावल, 2 किलोग्राम चने की दाल व 500 ग्राम खाद्य तेल दिया जाता है।
बच्चों को योजनाओं का भरपूर लाभ दिया जा रहा है। नियमित अभियान चलाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है। जरूरत के अनुसार बच्चों को पौष्टिक आहार भी दिया जाता है। जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है।
-दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी